हाईकोर्ट ने पूरे शहर में पीजी भवनों के निरीक्षण के दिए निर्देश, मुख्यमंत्री ने आसपास की जर्जर इमारतों को गिराने का आदेश दिया; हादसे के विरोध में एबीवीपी और सीजेपी का प्रदर्शन जारी
नई दिल्ली। दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पीजी (पेइंग गेस्ट) की इमारत ढहने की दर्दनाक घटना में मृतकों की संख्या बढ़कर सात हो गई है। हादसे के बाद राजधानी में अवैध एवं जर्जर पीजी भवनों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। घटना को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने पूरे शहर में संचालित पीजी भवनों के निरीक्षण के निर्देश दिए हैं। वहीं मुख्यमंत्री गुप्ता ने सत्य निकेतन के आसपास मौजूद जर्जर और असुरक्षित इमारतों को चिन्हित कर आवश्यक कार्रवाई करने तथा एक नजदीकी जर्जर भवन को गिराने के निर्देश दिए हैं।
घटना के बाद प्रशासनिक अमले में भी हड़कंप मचा हुआ है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जा रहे हैं कि राजधानी में पीजी के नाम पर ऐसी इमारतों का संचालन न हो, जो भवन संरचना, अग्नि सुरक्षा या अन्य जरूरी मानकों को पूरा नहीं करती हैं। हादसे ने दिल्ली में किराये और पीजी आवास व्यवस्था की निगरानी को लेकर भी बहस तेज कर दी है।
मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए चला राहत अभियान

सत्य निकेतन में पीजी भवन के अचानक ढहने के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इमारत का मलबा गिरने से उसके अंदर मौजूद लोगों के दबे होने की आशंका के चलते राहत एवं बचाव दलों ने तत्काल अभियान शुरू किया। मलबे को हटाने के दौरान बचावकर्मियों को काफी चुनौती का सामना करना पड़ा।
हादसे की गंभीरता को देखते हुए पुलिस, दमकल और बचाव दलों के साथ प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। मलबे के नीचे फंसे लोगों की तलाश के लिए लगातार अभियान चलाया गया। कई घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। हालांकि इस हादसे में सात लोगों की मौत ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया।
हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान, पूरे दिल्ली के पीजी की जांच के आदेश
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में पीजी भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने राजधानी में संचालित पीजी भवनों का व्यापक निरीक्षण कराने के निर्देश दिए हैं।
इस कार्रवाई का उद्देश्य यह पता लगाना है कि किन भवनों में सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है और किन जगहों पर नियमों की अनदेखी कर लोगों को रहने के लिए जगह उपलब्ध कराई जा रही है। निरीक्षण के दौरान भवन की स्थिति, सुरक्षा मानकों और संबंधित अनुमति समेत विभिन्न पहलुओं की जांच किए जाने की उम्मीद है।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब राजधानी के अलग-अलग इलाकों में पीजी भवनों की स्थिति प्रशासन की निगरानी में आ गई है। खासकर पुराने और जर्जर भवनों में संचालित पीजी को लेकर प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है।
मुख्यमंत्री ने जर्जर भवन गिराने के दिए निर्देश

हादसे के बाद मुख्यमंत्री गुप्ता ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सत्य निकेतन के आसपास मौजूद जर्जर इमारतों का निरीक्षण करने और लोगों की जान को खतरा पैदा करने वाले भवनों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने पास की एक जर्जर इमारत को भी गिराने का निर्देश दिया है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी संभावित दुर्घटना को रोकने के लिए असुरक्षित भवनों की पहचान कर जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
एबीवीपी और सीजेपी का प्रदर्शन जारी
हादसे को लेकर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का विरोध भी तेज हो गया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) सहित अन्य संगठनों की ओर से प्रदर्शन किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने पीजी में रहने वाले छात्रों और युवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने, भवनों की नियमित जांच कराने और हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है।
सीजेपी (CJP) की ओर से भी प्रदर्शन जारी रहने की बात सामने आई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि दिल्ली में बड़ी संख्या में विद्यार्थी और नौकरीपेशा युवा पीजी में रहते हैं। ऐसे में भवनों की सुरक्षा की अनदेखी सीधे तौर पर उनकी जान को खतरे में डाल सकती है।
पीजी व्यवस्था पर उठे सवाल
सत्य निकेतन जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवा और नौकरीपेशा लोग पीजी में रहते हैं। सीमित जगह में अधिक लोगों को रखने, भवनों की क्षमता से अधिक इस्तेमाल और सुरक्षा मानकों की अनदेखी जैसे आरोप समय-समय पर सामने आते रहे हैं।
इस हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राजधानी के सभी पीजी भवनों की नियमित जांच होती है? क्या जर्जर भवनों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त व्यवस्था है? और यदि किसी भवन में खामी मिलती है तो उसके खिलाफ समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं होती?
हादसे ने प्रशासन के सामने खड़ी की बड़ी चुनौती
सत्य निकेतन हादसे में सात लोगों की मौत के बाद अब प्रशासन के सामने राजधानी के पीजी भवनों की सुरक्षा व्यवस्था को नए सिरे से जांचने की चुनौती है। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद यदि व्यापक निरीक्षण अभियान शुरू होता है तो बड़ी संख्या में ऐसे भवन सामने आ सकते हैं, जहां सुरक्षा मानकों को लेकर कमियां मौजूद हों।
फिलहाल हादसे के बाद राहत एवं बचाव अभियान के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर जांच और कार्रवाई का दौर जारी है। मृतकों की संख्या बढ़कर सात पहुंचने से घटना की गंभीरता और बढ़ गई है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि जांच में हादसे के कारण क्या सामने आते हैं और लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।
सुरक्षा पर सबसे बड़ा सवाल
सत्य निकेतन हादसा सिर्फ एक इमारत के ढहने की घटना नहीं है, बल्कि यह राजधानी में पीजी और किराये के भवनों की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक तस्वीर पर सवाल खड़ा करता है। हाईकोर्ट के निरीक्षण आदेश और सरकार की कार्रवाई से उम्मीद है कि जर्जर तथा असुरक्षित भवनों की पहचान कर समय रहते कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
