
फर्जी दस्तावेजों से नामांतरण और आदिवासी भूमि के अंतरण की जांच में सामने आई अनियमितताएं, कलेक्टर ने तहसीलदार को कार्रवाई के दिए निर्देश
अंबिकापुर। प्रतीक्षा बस स्टैंड क्षेत्र में तालाब के रूप में दर्ज भूमि को कथित तौर पर पाटकर प्लाटिंग किए जाने के मामले में सरगुजा कलेक्टर ने सख्त रुख अपनाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर कार्यालय से 23 सितंबर 2026 को जारी निर्देश के अनुसार, तहसीलदार अंबिकापुर को जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर संबंधित लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराकर पालन प्रतिवेदन तत्काल प्रस्तुत करने को कहा गया है।
मामला अंबिकापुर के खसरा नंबर 3714 से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार, यह भूमि नगर निगम के मास्टर प्लान-2021 में तालाब के रूप में दर्ज है। शिकायतकर्ता सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश मिश्रा द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर मामले की जांच अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) अंबिकापुर से कराई गई।
राजस्व रिकॉर्ड की जांच में सामने आए सवाल
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, संबंधित भूमि का पुराना राजस्व रिकॉर्ड वर्ष 1954-55 से पहले जैलाल पिता बोधन, जाति गोंड के नाम दर्ज था। जांच में आरोप सामने आया कि बाद में इसी भूमि के नामांतरण के लिए दूसरे व्यक्ति जैलाल पिता देवराम से संबंधित वारिसान की जानकारी का इस्तेमाल किया गया।
रिपोर्ट में फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र के आधार पर फौती नामांतरण कराए जाने की बात भी सामने आई है। इसके बाद भूमि का पंजीकृत विक्रय गैर-आदिवासी व्यक्ति के पक्ष में किए जाने को लेकर भी जांच में गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
मृत्यु प्रमाण पत्र को लेकर भी विरोधाभास
जांच रिपोर्ट में जैलाल पिता बोधन की मृत्यु से संबंधित दस्तावेजों में भी विरोधाभास का उल्लेख है। अलग-अलग दस्तावेजों में उनकी मृत्यु की तारीख 12 अप्रैल 1963 और 23 अप्रैल 1976 बताई गई है।
वहीं नगर निगम अंबिकापुर से प्राप्त जानकारी का हवाला देते हुए जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि 23 अप्रैल 1976 की मृत्यु से संबंधित प्रमाण पत्र नगर निगम के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं मिला और उक्त प्रमाण पत्र नगर निगम द्वारा जारी किए जाने की पुष्टि भी नहीं हुई।

कई नाम जांच के दायरे में
जांच रिपोर्ट में चन्द्रशेखर यादव और खरीदार आजाद इराकी की भूमिका का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा अन्य सहखातेदारों और विक्रेताओं की भूमिका भी प्रथम दृष्टया संदिग्ध बताए जाने की बात रिपोर्ट में कही गई है।
रिपोर्ट में नोहरसाय, रामकुमार, श्रीलाल, पूर्णिमा, जनकुंवर, चन्द्रभान यादव और मीरा यादव के नाम भी दर्ज हैं। सभी को ग्राम अमलभिट्ठी, तहसील लखनपुर निवासी बताया गया है। जांच के अनुसार, इन लोगों द्वारा भी जैलाल पिता बोधन के वारिस के रूप में भूमि के विक्रय में भूमिका निभाने का उल्लेख है।
पंचायत के दस्तावेजों की भूमिका पर भी सवाल
जांच के दौरान ग्राम पंचायत अमलभिट्ठी के सरपंच और सचिव की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पंचायत क्षेत्र में जैलाल पिता देवराम और उनके वारिसों की जानकारी उपलब्ध होने के बावजूद जैलाल पिता बोधन के नाम से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कराने के लिए पंचनामा तैयार किए जाने की बात सामने आई है।
तालाब क्षेत्र को पाटकर प्लाटिंग की शिकायत
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया था कि प्रतीक्षा बस स्टैंड के पास स्थित तालाब के जल क्षेत्र को मिट्टी से पाटकर प्लाटिंग की जा रही है। शिकायत के मुताबिक, इस क्षेत्र का उपयोग आसपास के लोग निस्तारी, स्नान, कपड़े धोने और मवेशियों को पानी पिलाने के लिए करते रहे हैं। वर्ष 2002 में यहां छठ घाट बनाए जाने और छठ पूजा आयोजित किए जाने का भी उल्लेख शिकायत में किया गया है।
हालांकि, भूमि के वर्तमान स्वरूप और प्लाटिंग से जुड़े आरोपों पर अंतिम स्थिति संबंधित प्रशासनिक एवं कानूनी कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगी।
कलेक्टर ने तत्काल FIR के दिए निर्देश

एसडीओ राजस्व की जांच रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के आधार पर सरगुजा कलेक्टर ने तहसीलदार अंबिकापुर को संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। निर्देश में चन्द्रशेखर यादव, आजाद इराकी सहित अन्य नामित लोगों के विरुद्ध कथित धोखाधड़ी, छलकपट तथा फर्जी अथवा दोषपूर्ण दस्तावेजों के आधार पर भूमि अंतरण से संबंधित कानूनी कार्रवाई कराने को कहा गया है।
कलेक्टर ने प्राथमिकी दर्ज होने के बाद उसका पालन प्रतिवेदन भी तत्काल प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अब पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामले में किन-किन लोगों की क्या भूमिका रही और दस्तावेजों में कथित गड़बड़ी कैसे हुई।
