
वाड्रफनगर की जमीन के मामले में अपर कलेक्टर पर मिलीभगत और पैसे लेकर फैसला प्रभावित करने के आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग
वाड्रफनगर। बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर में आदिवासी भूमि से जुड़े एक पुराने राजस्व विवाद में नया मोड़ सामने आया है। मामले के आवेदक ने तत्कालीन अपर कलेक्टर आर.एन. पांडेय पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि प्रकरण में निर्धारित तारीख से पहले ही आदेश पारित कर दिया गया। आवेदक ने फैसले की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। हालांकि, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारी तथा अन्य पक्षों का जवाब उपलब्ध नहीं हो सका है।
विवाद ग्राम राजखेता स्थित खसरा नंबर 1035 की लगभग 0.28 हेक्टेयर भूमि से जुड़ा है। आवेदक के अनुसार, यह जमीन मूल रूप से आदिवासी परिवार से संबंधित थी। आरोप है कि भूमि अभिलेखों में संशोधन की प्रक्रिया के दौरान नियमों की अनदेखी हुई, जिसके कारण जमीन के स्वामित्व और राजस्व रिकॉर्ड को लेकर विवाद खड़ा हुआ।
2017 के आदेश से शुरू हुआ विवाद
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, तहसीलदार वाड्रफनगर ने 17 अक्टूबर 2017 को प्रकरण में आदेश पारित कर राजस्व रिकॉर्ड में सुधार किया था। इसके बाद मामला अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के समक्ष पहुंचा। एसडीओ ने 29 सितंबर 2025 को तहसीलदार का आदेश निरस्त करते हुए पूर्ववर्ती राजस्व रिकॉर्ड बहाल करने का निर्देश दिया।
एसडीओ के आदेश में खसरा नंबर 1035 और 1273 के बीच लगभग ढाई किलोमीटर की दूरी होने का उल्लेख किया गया था। ऐसे में दोनों खसरों को आपस में जोड़कर नक्शे में सुधार किए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठे। आदेश में प्रभावित पक्ष को सुनवाई का अवसर दिए जाने और राजस्व अभिलेखों में किए गए बदलावों की जांच की आवश्यकता भी सामने आई।
अपर कलेक्टर के आदेश की तारीख पर सवाल

इसके बाद मामला अपर कलेक्टर न्यायालय में अपील के रूप में पहुंचा। आवेदक का कहना है कि 16 सितंबर 2026 को दोनों पक्षों की ओर से लिखित तर्क प्रस्तुत किए गए थे और प्रकरण आदेश के लिए रखा गया था। आवेदक के अनुसार, अंतिम आदेश के लिए 7 अक्टूबर 2026 की तारीख निर्धारित थी, लेकिन आदेश 29 सितंबर 2026 को ही पारित कर दिया गया।
आवेदक ने इस घटनाक्रम को संदिग्ध बताते हुए तत्कालीन अपर कलेक्टर आर.एन. पांडेय पर कुछ पक्षों को लाभ पहुंचाने के लिए मिलीभगत करने और आर्थिक लेन-देन के जरिए फैसला प्रभावित करने का आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में स्वतंत्र रूप से सत्यापित साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। आदेश की वास्तविक तारीख और उसके पीछे की प्रक्रिया की पुष्टि प्रमाणित आदेश-पत्र तथा न्यायालयीन कार्यवाही के रिकॉर्ड से ही हो सकेगी।

निष्पक्ष जांच की मांग
आवेदक ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने, राजस्व रिकॉर्ड में हुए बदलावों की पड़ताल करने और संबंधित आदेश की प्रक्रिया की समीक्षा करने की मांग की है। मामले में यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि सभी प्रभावित पक्षों को नियमानुसार सुनवाई का अवसर दिया गया था या नहीं तथा आदेश पारित करने की तारीख और कार्यवाही के रिकॉर्ड में कोई विसंगति है या नहीं।
अब इस मामले में प्रमाणित आदेश-पत्र, संबंधित राजस्व अभिलेखों और दोनों पक्षों के बयान महत्वपूर्ण होंगे। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है। फिलहाल, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना बाकी है।
