29 अगस्त को हुआ था जानलेवा हमला, गुमनाम पत्र में जेल में बंद आरोपी सहित कई लोगों पर साजिश रचने का आरोप; एसपी राजेश अग्रवाल ने दिए जांच के निर्देश
अंबिकापुर। कांग्रेस मंडल अध्यक्ष गुरप्रीत सिंह सिद्धू पर 29 अगस्त को हुए जानलेवा हमले के मामले में अब एक नया और गंभीर मोड़ सामने आया है। गुरप्रीत सिंह सिद्धू को डाक के माध्यम से एक गुमनाम पत्र प्राप्त हुआ है, जिसमें उनकी हत्या की साजिश रचे जाने का दावा किया गया है। पत्र में जेल में बंद एक आरोपी सहित कुछ अन्य लोगों पर आपसी सांठगांठ कर सुपारी देकर हत्या कराने की योजना बनाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस पत्र के सामने आने के बाद उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुमनाम पत्र में सुनील साहू और श्याम विश्वकर्मा का नाम उल्लेखित करते हुए आरोप लगाया गया है कि पूर्व में हुए विवाद और मारपीट की घटना के बाद से गुरप्रीत सिंह के प्रति रंजिश रखी जा रही है। पत्र में दावा किया गया है कि गुरप्रीत सिंह की शिकायत पर मणिपुर थाना पुलिस द्वारा दर्ज अपराध के सिलसिले में सुनील साहू वर्तमान में केंद्रीय जेल में निरुद्ध है। इसके बावजूद जेल के बाहर मौजूद लोगों के माध्यम से कथित तौर पर हत्या की साजिश को अंजाम देने की तैयारी की जा रही है।
पत्र में रमेश कुमार शर्मा उर्फ टिटू (राउरकेला, ओडिशा), मनोज उर्फ भद्दू सरकार (परसुडीह, झारखंड) और शंकर मुंडा (सीतारामडेरा, झारखंड) सहित कुछ अन्य लोगों के नामों का उल्लेख किया गया है। गुमनाम सूचना में दावा किया गया है कि कथित तौर पर सुपारी देकर हत्या कराने के लिए रकम का लेनदेन किया गया है। साथ ही उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कुछ शूटरों के शामिल होने की आशंका भी जताई गई है।
पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि जेल में बंद आरोपी के साथ कथित सांठगांठ कर किसी तीसरे व्यक्ति के माध्यम से आर्थिक लेनदेन किया जा रहा है। पत्र के लेखक ने पुलिस और जेल प्रशासन से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, संबंधित लोगों की गतिविधियों की पड़ताल करने तथा संभावित खतरे को देखते हुए तत्काल सुरक्षा संबंधी कदम उठाने की मांग की है।
एसपी से मिलकर सौंपा आवेदन

गुमनाम पत्र मिलने के बाद गुरप्रीत सिंह सिद्धू ने पुलिस अधीक्षक राजेश अग्रवाल से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी दी और पत्र के आधार पर लिखित आवेदन सौंपा। बताया गया है कि पत्र पर प्रेषक का नाम और पता दर्ज नहीं है, हालांकि लिफाफे पर एक नाम अंकित है। आवेदन के साथ इस पत्र को भी पुलिस के संज्ञान में लाया गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक राजेश अग्रवाल ने तत्काल विवेचना कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। अब पुलिस के सामने गुमनाम पत्र की सत्यता की जांच करने, उसमें उल्लेखित नामों और कथित लेनदेन की पड़ताल करने तथा गुरप्रीत सिंह सिद्धू को किसी संभावित खतरे की आशंका का आकलन करने की चुनौती है।
पहले हमले के बाद अब हत्या की साजिश का दावा
गौरतलब है कि कांग्रेस मंडल अध्यक्ष गुरप्रीत सिंह सिद्धू पर 29 अगस्त को जानलेवा हमला हुआ था। इस घटना के बाद अब गुमनाम पत्र के माध्यम से हत्या की साजिश रचे जाने की सूचना मिलने से मामला और संवेदनशील हो गया है। हालांकि पत्र में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पत्र में किए गए दावे कितने तथ्यात्मक हैं और इसके पीछे वास्तविक साजिश है या किसी को भ्रमित करने का प्रयास।
फिलहाल गुरप्रीत सिंह सिद्धू द्वारा पुलिस अधीक्षक को शिकायत सौंपे जाने के बाद मामले में पुलिस की जांच और आगे की कार्रवाई पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।
