
सिलफिली में जल संरक्षण के लिए बनाया गया था चेकडैम, ग्रामीणों ने तकनीकी जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की
बलरामपुर। शंकरगढ़ जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत सिलफिली में करीब 20 लाख रुपये की लागत से निर्मित चेकडैम महज छह महीने के भीतर क्षतिग्रस्त होकर टूट गया। चेकडैम का बड़ा हिस्सा टूटने के बाद अब करीब छह अलग-अलग हिस्सों में बिखरा नजर आ रहा है। निर्माण के कुछ ही महीनों में संरचना के क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीणों ने निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की तकनीकी जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों के अनुसार, चेकडैम का निर्माण बारिश के पानी को रोकने, जल संरक्षण को बढ़ावा देने, भूजल स्तर में सुधार करने और आसपास के किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कराया गया था। निर्माण पूरा होने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि बारिश के दौरान इसमें पानी का संचय होगा, जिससे आसपास के खेतों और बस्तियों को लंबे समय तक लाभ मिल सकेगा। लेकिन निर्माण के कुछ ही समय बाद इसके क्षतिग्रस्त होने से योजना के उद्देश्य पर ही सवाल खड़े हो गए हैं।
छह हिस्सों में टूटा चेकडैम

स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण को अभी ज्यादा समय नहीं बीता था कि चेकडैम की संरचना में कमजोरी दिखाई देने लगी। बाद में इसका एक बड़ा हिस्सा टूट गया और वर्तमान में संरचना कई हिस्सों में बंटी हुई दिखाई दे रही है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य में यदि निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन किया गया होता और गुणवत्तापूर्ण सामग्री का इस्तेमाल हुआ होता तो इतनी कम अवधि में चेकडैम के क्षतिग्रस्त होने की स्थिति नहीं बनती। हालांकि, निर्माण में वास्तव में किस स्तर की खामी रही, इसकी पुष्टि तकनीकी जांच के बाद ही हो सकेगी।
ग्रामीणों ने मांगी तकनीकी जांच

चेकडैम के क्षतिग्रस्त होने के बाद ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता, नींव, डिजाइन, संरचना की मजबूती और निर्माण प्रक्रिया की जांच विशेषज्ञों की टीम से कराई जानी चाहिए।
ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि जांच में यदि किसी प्रकार की लापरवाही, तकनीकी कमी या वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों की भूमिका तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही सरकारी राशि के नुकसान का आकलन कर दोषी पाए जाने वालों से नियमानुसार वसूली की जाए।
एक ग्रामीण ने कहा कि करीब 20 लाख रुपये खर्च कर बनाए गए चेकडैम से क्षेत्र में पानी रोकने और किसानों को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद थी, लेकिन कुछ ही महीनों में इसके टूट जाने से ग्रामीणों को निराशा हुई है। वहीं एक अन्य ग्रामीण ने निर्माण की गुणवत्ता की जांच कराकर सरकारी धन के उपयोग की जिम्मेदारी तय करने की मांग की।
जल संरक्षण के उद्देश्य को लगा झटका
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में गर्मी के दिनों में पानी की समस्या रहती है। ऐसे में जल संरक्षण से जुड़े निर्माण कार्यों का टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण होना बेहद जरूरी है। चेकडैम का उद्देश्य केवल एक संरचना तैयार करना नहीं, बल्कि लंबे समय तक पानी का संरक्षण कर ग्रामीणों और किसानों को लाभ पहुंचाना था।
ग्रामीणों ने प्रशासन से जल संरक्षण से जुड़े निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी की व्यवस्था मजबूत करने की मांग भी की है, ताकि सरकारी राशि खर्च होने के बाद निर्माण कुछ ही समय में अनुपयोगी न हो जाए।
जांच के बाद ही सामने आएगी टूटने की वजह
फिलहाल चेकडैम टूटने की वास्तविक वजह स्पष्ट नहीं है। ग्रामीण निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन इसकी तकनीकी स्थिति और टूटने के कारणों की पुष्टि विशेषज्ञ जांच के बाद ही हो सकेगी।
अब ग्रामीणों की नजर जिला प्रशासन की कार्रवाई पर है। उनका कहना है कि चेकडैम के निर्माण की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए और यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई की जाए। इससे न केवल सरकारी राशि के उपयोग की जवाबदेही तय होगी, बल्कि भविष्य में जल संरक्षण से जुड़े निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी।
