घरों के दरवाजे से महज 3 मीटर दूर से गुजरा हाथी, 19 किसानों की करीब 5 एकड़ फसल तबाह; ग्रामीणों ने उठाए रात्रिकालीन सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

ओड़गी। मयूरधक्की ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम पुतकी में सोमवार की रात करीब छह जंगली हाथियों के झुंड ने जमकर उत्पात मचाया। हाथियों का झुंड खेतों को रौंदता हुआ गांव की बस्ती तक पहुंच गया। इस दौरान हाथी कई ग्रामीणों के घरों के बेहद करीब से गुजरे। एक घर के दरवाजे से हाथी की दूरी महज करीब तीन मीटर बताई जा रही है। हाथियों की मौजूदगी से पूरे गांव में दहशत फैल गई और ग्रामीणों ने रातभर घरों के दरवाजे बंद कर किसी तरह अपनी जान बचाई।
हाथियों ने खेतों में खड़ी धान, मक्का और अरहर की फसल को खाकर और रौंदकर बर्बाद कर दिया। ग्रामीणों के अनुसार करीब पांच एकड़ में लगी फसल को नुकसान पहुंचा है, जिसकी कीमत लगभग तीन लाख रुपये आंकी जा रही है। वन विभाग के अनुसार इस घटना में कुल 19 किसानों की फसल प्रभावित हुई है।
हादसे के दौरान ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता फसल नहीं, बल्कि अपनी और परिवार की सुरक्षा को लेकर रही। ग्रामीणों का आरोप है कि हाथियों के गांव में पहुंचने की सूचना देने के लिए रात में कई स्तर पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन तत्काल वन अमले की मदद नहीं मिल सकी। ग्रामीणों के अनुसार वन विभाग की टीम अगले दिन करीब सुबह 11 बजे गांव पहुंची। तब तक हाथियों का झुंड गांव से निकल चुका था।
घर की चौखट से महज तीन मीटर दूर था हाथी
पुतकी में हाथियों के आतंक का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक घर के दरवाजे से हाथी महज करीब तीन मीटर की दूरी से गुजर गया। घर के भीतर मौजूद परिवार ने दरवाजा बंद कर खुद को सुरक्षित रखा।
रात के अंधेरे में हाथियों के सामने आने के डर से कोई भी ग्रामीण घर से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा सका। बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर परिवारों में खासा भय बना रहा। ग्रामीणों का कहना है कि यदि हाथियों का सामना किसी व्यक्ति या बच्चे से हो जाता तो जानमाल का बड़ा नुकसान हो सकता था।
ग्रामीणों के मुताबिक हाथियों का झुंड काफी देर तक गांव और आसपास के खेतों में घूमता रहा। इस दौरान लोग अपने घरों के भीतर कैद होकर रह गए।
नेटवर्क की समस्या ने बढ़ाई परेशानी
पुतकी क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क की समस्या ने आपात स्थिति के दौरान ग्रामीणों की मुश्किल और बढ़ा दी। हाथियों के गांव में प्रवेश करने के बाद वन विभाग को सूचना देने के लिए ग्रामीण लगातार प्रयास करते रहे।
मौके पर मौजूद ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष लवकेश गुर्जर ने वन विकास निगम और वाइल्ड लाइफ के अधिकारियों को फोन कर स्थिति की जानकारी देने का प्रयास किया। ग्रामीणों का कहना है कि रात में तत्काल सहायता नहीं पहुंचने के कारण उन्हें खुद ही सावधानी बरतते हुए हाथियों से दूरी बनाए रखनी पड़ी।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब हाथियों का झुंड घरों की चौखट तक पहुंच गया था, तब रात्रि के समय वन अमले की मौजूदगी क्यों नहीं थी। हाथी प्रभावित गांवों में क्या नियमित रात्रिकालीन गश्त की व्यवस्था है? आपात स्थिति में ग्रामीणों की सूचना पर तत्काल मौके तक पहुंचने के लिए विभाग के पास क्या व्यवस्था है?
सुबह 11 बजे पहुंची वन विभाग की टीम
ग्रामीणों के अनुसार वन विकास निगम और वाइल्ड लाइफ की टीम मंगलवार सुबह करीब 11 बजे पुतकी पहुंची। टीम ने मौके पर पहुंचकर हाथियों द्वारा किए गए नुकसान का जायजा लिया और प्रभावित खेतों का निरीक्षण किया।
हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि जब हाथी गांव में मौजूद थे, उस समय उन्हें वन अमले की सबसे ज्यादा जरूरत थी। हाथियों के गांव से निकल जाने के बाद नुकसान का आकलन करना जरूरी है, लेकिन ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर रात में तत्काल हस्तक्षेप अधिक महत्वपूर्ण था।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि हाथियों के कारण रात में कोई जनहानि हो जाती तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होती, यह बड़ा सवाल है।
क्षेत्र में करीब 10 हाथियों की गतिविधि
डिप्टी रेंजर केंद्र मोहन यादव, चिकनी ने बताया कि क्षेत्र में करीब 10 हाथियों की गतिविधि बनी हुई है। पिछली रात छह हाथी पुतकी गांव पहुंचे थे। उनके अनुसार हाथियों के कारण 19 किसानों की फसल प्रभावित हुई है।
उन्होंने बताया कि पुतकी क्षेत्र तमोर पिंगला अभयारण्य से लगा हुआ है और हाथियों की मौजूदगी की सूचना तमोर पिंगला के कर्मचारियों को दी गई थी। हाथियों को भगाने के लिए उपयोग की जाने वाली गाड़ी भी उनके पास उपलब्ध है।
डिप्टी रेंजर के अनुसार प्रभावित फसलों का पटवारी के माध्यम से निरीक्षण कराया जाएगा। सर्वेक्षण और नुकसान के आकलन के बाद नियमानुसार किसानों को मुआवजा देने की कार्रवाई की जाएगी।
19 किसानों की फसल प्रभावित

हाथियों के झुंड ने खेतों में तैयार खड़ी फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। प्रभावित किसानों में रघु/बिरसाय पंडो, रमेश/हिरासाय पंडो, रामध्यान/मुनिलाल गुर्जर और परशुराम/मानसाय खैरवार सहित अन्य किसान शामिल हैं।
किसानों का कहना है कि फसल तैयार करने में उन्हें कई महीनों तक मेहनत करनी पड़ी। बीज, खाद, मजदूरी और अन्य कृषि खर्च के बाद जब फसल तैयार होने लगी तो हाथियों के झुंड ने खेतों में पहुंचकर उसे रौंद दिया।
किसानों के सामने अब दोहरी चिंता है। एक ओर फसल बर्बाद होने से आर्थिक नुकसान हुआ है, वहीं दूसरी ओर आने वाले समय में परिवार की जरूरतों और अगली फसल के लिए खेती में लगने वाली लागत की व्यवस्था करना भी चुनौती बन गया है।
मुआवजे के साथ सुरक्षा की भी मांग
ग्रामीणों का कहना है कि फसल नुकसान का सर्वे और मुआवजा जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी उनकी जान-माल की सुरक्षा है। हाथियों की आवाजाही क्षेत्र में लगातार बनी हुई है। ऐसे में यदि हाथियों का झुंड दोबारा रात में गांव में प्रवेश करता है तो ग्रामीणों को समय पर मदद कैसे मिलेगी, यह सबसे बड़ा सवाल है।
ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष लवकेश गुर्जर ने हाथी प्रभावित गांवों में रात्रिकालीन वन अमले की तैनाती, नियमित गश्त और प्रभावी निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने प्रभावित किसानों की फसल का तत्काल सर्वे कर उचित मुआवजा देने की मांग भी की है।
इसके साथ ही पुतकी क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क की समस्या दूर करने की मांग उठाई गई है, ताकि भविष्य में हाथियों के गांव में आने अथवा किसी अन्य आपात स्थिति में ग्रामीण तत्काल संबंधित विभाग को सूचना दे सकें।
पुतकी की रात ने खड़े किए कई सवाल
पुतकी में हुई घटना ने सिर्फ फसल नुकसान ही नहीं, बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने की प्रशासनिक तैयारियों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जब किसी क्षेत्र में हाथियों की गतिविधि पहले से बनी हुई है और गांव अभयारण्य से लगा हुआ है, तो ऐसे संवेदनशील गांवों में रात्रिकालीन निगरानी और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था कितनी प्रभावी है, यह जांच का विषय है।
ग्रामीणों ने रातभर अपने घरों के दरवाजे बंद रखकर भय के बीच समय बिताया। हाथी घरों से कुछ ही मीटर की दूरी से गुजरते रहे। सुबह वन अमला पहुंचा और नुकसान का जायजा लिया।
अब पुतकी के ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता यही है कि अगली रात यदि हाथियों का झुंड फिर गांव में पहुंचता है तो क्या वन विभाग समय पर मौके पर पहुंचेगा? ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें मुआवजे के साथ ऐसी व्यवस्था चाहिए, जिससे अगली बार उन्हें अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए रातभर अकेले दहशत में न रहना पड़े।
