शिक्षा के साथ नैतिक मूल्य, संस्कार और अनुशासन को बताया सफलता का आधार; रजवारीपारा से भंडारपारा तक निकाली गई जागरूकता रैली

ओड़गी। अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर शासकीय नवीन महाविद्यालय ओड़गी में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को शिक्षा और साक्षरता के महत्व के साथ-साथ नैतिक मूल्यों, संस्कार, अनुशासन तथा स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना रहा। कार्यशाला के दौरान वक्ताओं ने शिक्षा को व्यक्ति के सर्वांगीण विकास और समाज एवं राष्ट्र की प्रगति का महत्वपूर्ण आधार बताया।

कार्यशाला में वक्ताओं ने कहा कि भारत में शिक्षा का दायरा लगातार विस्तृत हो रहा है और देश ज्ञान एवं शिक्षा के क्षेत्र में विश्व पटल पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और शिक्षा पद्धति की अपनी विशिष्ट पहचान है। शिक्षा के साथ संस्कार और नैतिक मूल्यों का समावेश भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण विशेषता रही है। विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में इन मूल्यों की भूमिका महत्वपूर्ण है।

डिजिटल युग में संस्कार और अनुशासन जरूरी

महाविद्यालय के प्राचार्य रंजीत कुमार सातपुते ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में ज्ञान प्राप्त करना पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है। इंटरनेट और आधुनिक तकनीक के माध्यम से विद्यार्थी दुनिया भर की जानकारी कुछ ही समय में हासिल कर सकते हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि तकनीक ज्ञान का माध्यम हो सकती है, लेकिन नैतिक मूल्य, अनुशासन, संस्कार और जीवन जीने की सही दिशा विद्यार्थियों को शिक्षकों एवं शैक्षणिक संस्थानों से मिलती है।

प्राचार्य ने कहा कि आधुनिकीकरण और प्रतिस्पर्धा की दौड़ में कई बार नैतिक मूल्य और जीवन अनुशासन पीछे छूटते दिखाई देते हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को संयमित और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की जरूरत है। उन्होंने विद्यार्थियों से योग, व्यायाम और प्राणायाम को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने बुरी आदतों और विशेष रूप से नशे से दूर रहने की अपील की।

शिक्षा से होता है व्यक्तित्व का निर्माण

सहायक प्राध्यापक दिनेश कुमार ने कहा कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के व्यक्तित्व और सोच का निर्माण करती है। शिक्षित व्यक्ति अपने विकास के साथ समाज और राष्ट्र के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा के महत्व को समझने तथा शिक्षा एवं साक्षरता का संदेश समाज के अन्य लोगों तक पहुंचाने का आह्वान किया।

समय प्रबंधन पर दिया जोर

डॉ. राहुल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा के साथ समय प्रबंधन भी बेहद जरूरी है। विद्यार्थियों को अपने समय का उचित उपयोग करते हुए अध्ययन, व्यक्तिगत विकास और अन्य रचनात्मक गतिविधियों के बीच संतुलन बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि समय का सही नियोजन विद्यार्थियों को लक्ष्य प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

शिक्षक की भूमिका पर डाला प्रकाश

डॉ. भौमिक ने शिक्षक और टीचर शब्द की व्याख्या करते हुए इनके भावार्थ तथा समाज में शिक्षक की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षक की भूमिका केवल विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम पढ़ाने तक सीमित नहीं है। शिक्षक विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण, संस्कार, अनुशासन और जीवन मूल्यों के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षकों के मार्गदर्शन का लाभ उठाने और शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार एवं सकारात्मक सोच को अपने जीवन में अपनाने की अपील की।

विद्यार्थियों ने ली साक्षरता प्रसार की शपथ

कार्यशाला में महाविद्यालय के शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों को साक्षरता एवं शिक्षा के प्रसार की शपथ दिलाई गई। विद्यार्थियों ने समाज में शिक्षा के महत्व का संदेश पहुंचाने और साक्षरता के प्रति लोगों को जागरूक करने का संकल्प लिया।

रजवारीपारा से भंडारपारा तक निकली साक्षरता रैली

कार्यशाला के बाद विद्यार्थियों द्वारा जागरूकता रैली निकाली गई। रैली महाविद्यालय परिसर से प्रारंभ होकर रजवारीपारा और भंडारपारा तक पहुंची। विद्यार्थियों ने हाथों में संदेशात्मक नारों और स्लोगन के माध्यम से लोगों को शिक्षा एवं साक्षरता के महत्व के प्रति जागरूक किया।

रैली के दौरान विद्यार्थियों ने लोगों को शिक्षा के महत्व, निरक्षरता दूर करने तथा समाज में ज्ञान का प्रकाश फैलाने का संदेश दिया। रैली के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि शिक्षा केवल व्यक्तिगत विकास का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्र निर्माण का भी मजबूत आधार है।

स्वयंसेवकों ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

कार्यक्रम को सफल बनाने में स्वयंसेवक बालकुमार यादव, सृष्टि बियर, गीता रजवाड़े, देवकुवर, प्रियंका रजवाड़े, रविंद्र चेरवा, गायत्री रजक, लक्ष्मी सिंह सहित अन्य विद्यार्थियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। महाविद्यालय परिवार ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले सभी विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *