सरगुजा विकास संघर्ष समिति ने किया विधायक निवास घेराव का प्रयास, मंत्री ने माना—अंबिकापुर की सड़कें खराब हैं; बोले- बारिश थमते ही शुरू होगा निर्माण

अंबिकापुर। अंबिकापुर की जर्जर सड़कों को लेकर लंबे समय से चल रही शिकायतों और आंदोलनों के बीच गुरुवार को एक बार फिर सड़क का मुद्दा सड़क पर आ गया। सरगुजा विकास संघर्ष समिति ने कलेक्टर और पुलिस से अनुमति लेकर विधायक निवास के घेराव का कार्यक्रम बनाया। आंदोलनकारियों का कहना था कि शहर की सड़कों की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि अब गड्ढों से होकर गुजरना अंबिकापुरवासियों की रोजमर्रा की मजबूरी बन गई है।
आंदोलन के दौरान पुलिस की भारी व्यवस्था रही। काफी देर तक इंतजार के बाद मंत्री राजेश अग्रवाल आंदोलनकारियों के बीच पहुंचे और उनकी बातें सुनीं। मंत्री ने कहा कि वे सूरजपुर में थे और जब उन्हें जानकारी मिली कि उनके निवास का घेराव किया जा रहा है, तो वे स्वयं आंदोलनकारियों से मिलने पहुंचे।
मंत्री ने सड़क की बदहाली को स्वीकार करते हुए कहा कि सड़कों की वर्तमान स्थिति वास्तव में खराब है और इसे स्वीकार करने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने बताया कि बेहतर सड़क निर्माण के लिए टेंडर हो चुके हैं। इस वर्ष अधिक बारिश और कई स्थानों पर जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण सड़क निर्माण और मरम्मत के काम में परेशानी आई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि बारिश रुकते ही सड़क निर्माण का काम शुरू कर दिया जाएगा।
आज से रिपेयरिंग, बारिश के बाद नई सड़क… यानी कहानी फिर वहीं!

मंत्री ने यह भी कहा कि जहां तत्काल रिपेयरिंग की जरूरत है, वहां आज से ही मरम्मत का काम शुरू करवाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले सप्ताह भी मरम्मत का प्रयास किया गया था, लेकिन लगातार बारिश और जल निकासी की समस्या के कारण काम आगे नहीं बढ़ सका।
मंत्री ने आंदोलनकारियों और शहर की जनता की पीड़ा को अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि बरसात खत्म होते ही सड़कों का निर्माण कराया जाएगा।
अब यहां सवाल सड़क से ज्यादा उस पुराने वादे की नई तारीख का है।
अंबिकापुर की जनता पिछले कई वर्षों से एक ही संवाद सुनती आ रही है—“बारिश खत्म होने दीजिए, सड़क बन जाएगी।”
बारिश आती है, सड़क बिगड़ती है, आंदोलन होता है, आश्वासन मिलता है और फिर अगली बारिश तक मामला पहुंच जाता है।
इस बार भी कहानी में किरदार वही हैं, समस्या वही है और संवाद भी लगभग वही—बस उम्मीद है कि इस बार “बरसात खत्म होने के बाद” वाला एपिसोड वास्तव में खत्म हो।
आंदोलनकारियों ने कहा—सड़क चाहिए, भाषण नहीं

समिति से जुड़े सुजान बिंद ने कहा कि सरगुजा की सड़कों की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। शहर की आबादी दो लाख से अधिक है और हजारों वाहन प्रतिदिन इन सड़कों से गुजरते हैं। उन्होंने कहा कि सड़क की बदहाली के कारण बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग तक गिरकर चोटिल हो रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि घटिया निर्माण और भ्रष्टाचार के कारण सड़कों की स्थिति लगातार खराब होती गई है। उनका कहना था कि नेता चुनाव के समय गली-मोहल्लों तक पहुंचते हैं, लेकिन चुनाव के बाद उन्हीं गलियों की स्थिति देखने की फुर्सत नहीं मिलती।
आंदोलनकारियों ने दो टूक कहा—“हमें सड़क चाहिए, भाषण नहीं।”
राखी का गिफ्ट भी सड़क ही मांग लिया!
आंदोलन में शामिल एक समाजसेवी ने मंत्री से भावुक अंदाज में कहा कि वे मंत्री जी से राखी के गिफ्ट के रूप में अच्छी सड़क मांग रही हैं। उनका कहना था कि अगर महिलाएं स्वस्थ रहेंगी, बच्चे सुरक्षित रहेंगे और लोग बिना गड्ढों में गिरे सफर कर पाएंगे, तभी समाज और देश का विकास सही मायने में होगा।
यानी इस बार राखी पर बहन ने मिठाई, साड़ी या कोई महंगा तोहफा नहीं मांगा—बस ऐसी सड़क मांग ली जिस पर चलते समय कमर और घुटनों को “एडवेंचर स्पोर्ट्स” न करना पड़े।
जनता की पीड़ा बनाम आश्वासन की पुरानी पटकथा

आंदोलनकारियों ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि मंत्री और विधायक के घेराव के बाद सड़क की समस्या को लेकर कोई ठोस कार्रवाई सामने आएगी। मंत्री ने उनकी बातें सुनीं और जल्द सड़क निर्माण का आश्वासन दिया।
लेकिन जनता के सामने अब असली सवाल यही है कि “बारिश खत्म होने के बाद सड़क बनेगी” का वादा आखिर इस बार कितनी दूर तक जाता है?
क्योंकि अंबिकापुर की सड़कें बारिश में खराब होती हैं, जनता आंदोलन करती है, जिम्मेदार अधिकारी-मंत्री आश्वासन देते हैं और फिर कहा जाता है—“बारिश खत्म होने दीजिए…”
अब जनता शायद यही चाहती है कि अगली बार बारिश खत्म होने की सूचना के साथ सड़क निर्माण पूरा होने की खबर भी मिले।
फिलहाल आंदोलन समाप्त हो गया, आश्वासन फिर मिल गया और सड़कें अपनी जगह हैं—गड्ढों के साथ।
जनता के लिए फिलहाल यही उम्मीद है कि इस बार “बारिश खत्म होने के बाद” सिर्फ एक और राजनीतिक जुमला साबित न हो, बल्कि अंबिकापुर की सड़कों पर सचमुच डामर बिछे।

