लंबित न्यायालयीन मामलों के साथ प्री-लिटिगेशन प्रकरण भी होंगे शामिल, बैंक, बिजली, मोटर दुर्घटना, चेक बाउंस और पारिवारिक विवादों के मामलों पर होगी सुनवाई

अंबिकापुर, 11 सितंबर। आपसी सुलह और राजीनामे के माध्यम से मामलों का त्वरित निराकरण करने के उद्देश्य से 12 सितंबर 2026, शनिवार को नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा), नई दिल्ली के तत्वावधान में आयोजित होने वाली इस देशव्यापी लोक अदालत का आयोजन छत्तीसगढ़ में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (सालसा), बिलासपुर के मार्गदर्शन में जिला एवं तालुका स्तर के न्यायालयों में किया जाएगा। वर्ष 2026 में यह तीसरी नेशनल लोक अदालत होगी।

लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य ऐसे मामलों का आपसी सहमति से समाधान करना है, जिनमें पक्षकार न्यायालयीन प्रक्रिया को लंबा खींचने के बजाय आपसी समझौते से विवाद समाप्त करना चाहते हैं। इसके माध्यम से लंबित मामलों की संख्या कम करने के साथ पक्षकारों को अपेक्षाकृत त्वरित और सुलभ न्याय उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है।

इन मामलों का होगा निराकरण

नेशनल लोक अदालत में न्यायालयों में लंबित विभिन्न शमनीय आपराधिक प्रकरण, मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण, परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत चेक बाउंस मामले, भरण-पोषण से जुड़े प्रकरण, पारिवारिक एवं वैवाहिक विवाद सहित राजीनामा योग्य मामलों का निराकरण किया जाएगा।

इसके अलावा सिविल प्रकरण, निष्पादन प्रकरण, बैंक रिकवरी, विद्युत संबंधी विवाद, किराया नियंत्रण से जुड़े मामले तथा अन्य समझौता योग्य मामलों को भी लोक अदालत में रखा जाएगा।

प्री-लिटिगेशन मामलों को भी मिलेगा समाधान

लोक अदालत में केवल न्यायालयों में पहले से लंबित मामलों की ही सुनवाई नहीं होगी, बल्कि प्री-लिटिगेशन प्रकरणों को भी आपसी सहमति से सुलझाने का अवसर मिलेगा। बैंक, विद्युत विभाग, दूरसंचार विभाग, नगर निगम, नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों से संबंधित वसूली के मामलों को इसके लिए चिन्हित किया जाएगा।

राजस्व न्यायालयों में खातेदारों के बीच आपसी बंटवारे, वारिसों के मध्य बंटवारे तथा अन्य समझौता योग्य राजस्व मामलों को भी लोक अदालत के माध्यम से निपटाने का प्रयास किया जाएगा।

खण्डपीठों का गठन

नेशनल लोक अदालत के सफल आयोजन के लिए विभिन्न न्यायालयों में खण्डपीठों का गठन किया गया है। संबंधित प्रकरणों को चिन्हित कर खण्डपीठों के समक्ष रखा जाएगा, जहां दोनों पक्षों की सहमति और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर मामलों का निराकरण किया जाएगा।

पक्षकार अपने लंबित मामलों में आपसी समझौते की संभावना होने पर लोक अदालत के माध्यम से विवाद समाप्त कर सकते हैं। वहीं प्री-लिटिगेशन मामलों के लिए संबंधित विभाग अथवा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।

संपत्ति और नामांतरण से जुड़े मामले भी होंगे शामिल

लोक अदालत में कुछ राजस्व एवं संपत्ति संबंधी विवादों को भी आपसी सहमति के आधार पर सुलझाने का अवसर मिलेगा। इनमें बंटवारा, कब्जे के आधार पर बंटवारे से जुड़े मामले तथा विक्रय पत्र, दानपत्र और वसीयतनामा के आधार पर नामांतरण से संबंधित प्रकरण शामिल किए जाएंगे।

इसके साथ ही रेन्ट कंट्रोल एक्ट, सुखाधिकार से जुड़े मामलों और अन्य ऐसे मामलों को भी चिन्हित किया जाएगा, जिनका कानूनी रूप से आपसी राजीनामे के आधार पर निराकरण संभव है।

त्वरित और सुलभ न्याय की दिशा में पहल

नेशनल लोक अदालत को न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ कम करने के साथ आम नागरिकों को सरल एवं सुलभ तरीके से विवादों के समाधान का अवसर उपलब्ध कराने की प्रभावी व्यवस्था माना जाता है। राजीनामे के माध्यम से मामले का निराकरण होने से पक्षकारों को लंबे समय तक चलने वाली न्यायालयीन प्रक्रिया से राहत मिल सकती है।

12 सितंबर को आयोजित होने वाली लोक अदालत में चिन्हित मामलों के पक्षकारों को आपसी सहमति से अपने विवाद का समाधान कराने का अवसर मिलेगा। विभिन्न विभागों और न्यायालयों से संबंधित प्रकरणों को नियमानुसार लोक अदालत की खण्डपीठों के समक्ष प्रस्तुत कर उनका निराकरण किया जाएगा।

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