सर्व आदिवासी समाज ने अजाक थाना प्रभारी को सौंपा आवेदन, सार्वजनिक बयानों और मूल प्रकरण की निष्पक्ष विवेचना की उठाई मांग

अंबिकापुर। स्कूल रोड स्थित अनुपम वस्त्रालय प्रकरण को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। सर्व आदिवासी समाज महिला प्रकोष्ठ की जिला अध्यक्ष सुनीता सोनहा ने अजाक थाना, अंबिकापुर में आवेदन सौंपकर प्रकरण की पीड़िता के संबंध में सार्वजनिक रूप से कथित आपत्तिजनक एवं चरित्र पर सवाल उठाने वाले बयानों की जांच की मांग की है। आवेदन में सोशल मीडिया एवं अन्य माध्यमों से प्रसारित कथित बयानों की सत्यता की जांच कर, यदि अपराध के आवश्यक तत्व पाए जाएं तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की मांग की गई है।
आवेदन के मुताबिक, 11 अगस्त 2026 को स्कूल रोड स्थित अनुपम वस्त्रालय में एक आदिवासी महिला के साथ कथित यौन दुर्व्यवहार की घटना सामने आई थी। इस मामले में सिटी कोतवाली अंबिकापुर में अपराध क्रमांक 0563/2026 दर्ज कर विवेचना शुरू की गई थी।
प्रारंभिक विवेचना को लेकर भी उठाए सवाल
विडियो न्यूज़
सर्व आदिवासी समाज की ओर से दिए गए आवेदन में आरोप लगाया गया है कि प्रारंभिक विवेचना के दौरान आरोपी की पहचान एवं नाम से संबंधित कथित गड़बड़ी हुई तथा पीड़िता द्वारा बताए गए कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को विवेचना में उचित रूप से शामिल नहीं किया गया।
आवेदन में यह भी कहा गया है कि पीड़िता के कथन को कथित रूप से प्रभावित करने के प्रयास की शिकायत के बाद संबंधित प्रथम विवेचक के विरुद्ध वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है। समाज ने अब पीड़िता का विस्तृत पूरक कथन दर्ज कराने और छूटे हुए तथ्यों की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
रवीन्द्र तिवारी के कथित बयान की जांच की मांग

आवेदन में CAIT सरगुजा से जुड़े व्यक्तियों द्वारा रवीन्द्र तिवारी के नेतृत्व में पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपे जाने का भी उल्लेख किया गया है। समाज का कहना है कि किसी मामले की निष्पक्ष जांच या कार्रवाई की मांग करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन किसी लंबित आपराधिक प्रकरण की पीड़िता के व्यक्तिगत चरित्र अथवा सामाजिक पहचान को लेकर सार्वजनिक टिप्पणी किए जाने की स्थिति में उसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
आवेदन में रवीन्द्र तिवारी के नाम से एक कथित बयान का उल्लेख किया गया है, जिसमें पीड़िता के संबंध में कहा गया बताया गया है कि “उक्त महिला शंकरगढ़ थाने में पहले भी इस तरह का कृत्य कर चुकी है।”
सर्व आदिवासी समाज ने पुलिस से मांग की है कि थाना शंकरगढ़ के आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच कर यह सत्यापित किया जाए कि संबंधित महिला के खिलाफ या उसके द्वारा पूर्व में इस प्रकार की कोई शिकायत या FIR दर्ज थी या नहीं। यदि ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं मिलता है तो कथित बयान का स्रोत और आधार भी जांचा जाए।
आदिवासी समाज को लेकर कथित टिप्पणी पर भी आपत्ति
आवेदन में अनुसूचित जनजाति समुदाय के संबंध में कथित तौर पर की गई एक सामान्यीकृत टिप्पणी का भी उल्लेख है। समाज का आरोप है कि आदिवासी समुदाय के लोगों को सरकारी लाभ या राशि के लालच में Atrocity Act के मामले दर्ज कराने वाला बताने जैसी टिप्पणी की गई।
समाज ने इस कथित बयान की मूल वीडियो या ऑडियो रिकॉर्डिंग, सोशल मीडिया पोस्ट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित कर उनकी प्रामाणिकता की जांच कराने की मांग की है।
CCTV और डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित कराने की मांग

आवेदन में अनुपम वस्त्रालय और आसपास के प्रतिष्ठानों के उपलब्ध CCTV/DVR/NVR फुटेज, मोबाइल रिकॉर्डिंग तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित कर विवेचना में शामिल करने की मांग की गई है।
साथ ही पीड़िता के कथन, चिकित्सकीय दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और अन्य उपलब्ध सामग्री के आधार पर मूल प्रकरण में लागू कानूनी धाराओं की समीक्षा करने की मांग भी की गई है।
अपराध के तत्व मिलने पर कार्रवाई की मांग
सर्व आदिवासी समाज ने कहा है कि कथित सार्वजनिक बयानों की जांच के दौरान यदि भारतीय न्याय संहिता, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम या अन्य लागू कानूनों के तहत अपराध के आवश्यक तत्व पाए जाते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की जाए।
समाज ने यह भी मांग की है कि मूल अनुपम वस्त्रालय प्रकरण की विवेचना निष्पक्ष एवं प्रभावी तरीके से पूरी की जाए और पीड़िता या गवाहों पर दबाव डालने अथवा विवेचना को प्रभावित करने का कोई तथ्य सामने आने पर संबंधित लोगों की भूमिका की जांच की जाए।
फिलहाल इन बयानों और लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में पुलिस जांच के बाद ही कथित बयानों की वास्तविकता और उनकी कानूनी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।



