सरगुजा में 59 तालाबों के गहरीकरण को मिली मंजूरी, जल संरक्षण के साथ ग्रामीणों को रोजगार और खेती को सिंचाई का सहारा

अम्बिकापुर, 17 सितंबर 2026। गांवों का विकास केवल सड़क, भवन और दूसरी आधारभूत सुविधाओं तक सीमित नहीं है। ग्रामीण जीवन और अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए स्थानीय जलस्रोतों का संरक्षण भी उतना ही जरूरी है। इसी उद्देश्य से सरगुजा जिले में ‘मोर गांव मोर पानी महाअभियान’ के तहत तालाबों के गहरीकरण और जलस्रोतों के संरक्षण का काम किया जा रहा है।

अभियान के तहत जिले में 59 तालाबों के गहरीकरण कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इन कार्यों से तालाबों की जलधारण क्षमता बढ़ाने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करने और कृषि गतिविधियों को सहारा देने का प्रयास किया जा रहा है।

रामपुर का कबीर चबूतरा तालाब बना मिसाल

जनपद पंचायत अम्बिकापुर की ग्राम पंचायत रामपुर स्थित कबीर चबूतरा तालाब इस अभियान के प्रभाव का उदाहरण बनकर सामने आया है। करीब 7.31 लाख रुपये की स्वीकृत राशि से तालाब का गहरीकरण कराया गया। काम से पहले सिल्ट जमा होने के कारण तालाब की जलधारण क्षमता कम हो गई थी और गर्मी में इसके सूखने की स्थिति बन जाती थी।

गहरीकरण के बाद तालाब में अधिक पानी संग्रहित हो रहा है। इस कार्य से 2,395 मानव दिवस का रोजगार भी सृजित हुआ। यानी एक ही कार्य से जल संरक्षण के साथ स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों को रोजगार का अवसर मिला।

भूजल स्तर सुधारने में मदद

तालाबों की क्षमता बढ़ने से बारिश के पानी को अधिक समय तक रोककर रखने में मदद मिलती है। इससे आसपास के क्षेत्रों में भूजल पुनर्भरण की संभावना भी बढ़ती है। रामपुर में तालाब गहरीकरण के बाद आसपास के कुओं और बोरवेल में जल उपलब्धता बेहतर होने का लाभ ग्रामीणों को मिलने की जानकारी दी गई है।

गर्मी के दिनों में पेयजल स्रोतों को बनाए रखने में भी ऐसे जलस्रोत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

खेती के लिए बढ़ेंगी संभावनाएं

गांवों की अर्थव्यवस्था में जलस्रोतों का सीधा संबंध कृषि से है। तालाब में पर्याप्त पानी रहने पर किसानों को सिंचाई के अतिरिक्त स्रोत की सुविधा मिल सकती है। रामपुर के कबीर चबूतरा तालाब से रबी फसल के लिए सिंचाई की संभावना भी बढ़ी है।

सिंचाई के अतिरिक्त साधन मिलने से किसानों की बारिश पर निर्भरता कम हो सकती है और अधिक क्षेत्र में खेती करने के अवसर बन सकते हैं।

पशुओं और ग्रामीणों को भी मिलेगा लाभ

ग्रामीण क्षेत्रों में तालाबों का उपयोग केवल सिंचाई के लिए नहीं होता। पशुओं के लिए पानी और दैनिक निस्तारी में भी इनका महत्वपूर्ण योगदान रहता है। तालाबों में लंबे समय तक पानी उपलब्ध रहने से ग्रामीणों और पशुधन दोनों के लिए जल सुविधा बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

रोजगार और आजीविका का आधार

जलस्रोतों के संरक्षण का असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। पर्याप्त पानी उपलब्ध होने पर मछली पालन, पशुपालन और कृषि आधारित दूसरी गतिविधियों के लिए अवसर विकसित किए जा सकते हैं। वहीं तालाबों के गहरीकरण जैसे कार्यों से निर्माण अवधि में स्थानीय श्रमिकों को रोजगार मिलता है।

इस तरह तालाब संरक्षण को केवल निर्माण कार्य के बजाय जल सुरक्षा, रोजगार और ग्रामीण आजीविका से जोड़कर देखा जा रहा है।

59 तालाबों से दीर्घकालिक जल सुरक्षा की उम्मीद

‘मोर गांव मोर पानी महाअभियान’ के तहत स्वीकृत 59 तालाबों के गहरीकरण कार्यों से जिले में जल संरक्षण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। तालाबों में पानी की क्षमता बढ़ने से भूजल पुनर्भरण, सिंचाई, पशुओं के लिए पानी और ग्रामीण निस्तारी जैसी जरूरतों में सहयोग मिल सकता है।

‘मोर गांव मोर पानी’ का मूल संदेश गांव के जलस्रोतों को मजबूत कर पानी को अधिक समय तक गांव में रोकने और उसका लाभ स्थानीय परिवारों, किसानों तथा पशुधन तक पहुंचाने से जुड़ा है।

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