जल संरक्षण की पहल से बारिश का पानी हुआ सुरक्षित, भूजल पुनर्भरण के साथ ग्रामीण परिवार को मिला अतिरिक्त आजीविका का आधार

अम्बिकापुर, 18 सितंबर 2026। ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण के छोटे प्रयास कई परिवारों की आजीविका को नया सहारा दे सकते हैं। ननकू यादव पिता चमरू यादव के लिए क्षेत्र में निर्मित डबरी इसका उदाहरण बनी है। आज डबरी में पर्याप्त पानी उपलब्ध है, जिसका उपयोग परिवार अपनी जरूरतों के साथ खेती और मछली पालन जैसी गतिविधियों में कर रहा है।
बारिश का पानी सहेजने का मिला स्थायी माध्यम
डबरी के निर्माण से वर्षा जल को एक स्थान पर संग्रहित करना संभव हुआ है। इससे बारिश के बाद भी कुछ समय तक पानी उपलब्ध रहता है। डबरी में संचित पानी का आवश्यकता के अनुसार उपयोग किए जाने के साथ इसके जमीन में रिसाव से भूजल पुनर्भरण में भी मदद मिलने की बात कही गई है।
इस जल संरचना से आसपास के क्षेत्र में पानी को सहेजने और उपलब्ध संसाधन के बेहतर उपयोग का अवसर मिला है। ग्रामीण स्तर पर ऐसी संरचनाएं बारिश के पानी को सीधे बह जाने से रोकने में उपयोगी साबित हो सकती हैं।
खेती और मछली पालन को मिला सहारा

ननकू यादव के अनुसार डबरी उनके परिवार के लिए काफी उपयोगी साबित हुई है। इसमें जमा पानी का जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल किया जा रहा है। खेती के साथ मछली पालन से भी परिवार को अतिरिक्त आजीविका का सहारा मिला है।
ननकू यादव ने डबरी निर्माण के लिए सरकार के प्रति आभार जताते हुए कहा कि जल उपलब्ध होने से उनके परिवार को अपनी आजीविका से जुड़ी गतिविधियों को आगे बढ़ाने में मदद मिली है।
जल संरक्षण के साथ आजीविका का आधार
डबरी अब ननकू यादव के लिए केवल पानी जमा करने की संरचना नहीं रह गई है। यह जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और आजीविका से जुड़ा उपयोगी संसाधन बन चुकी है। बारिश के पानी को स्थानीय स्तर पर रोककर उसका उपयोग करने से खेती और अन्य गतिविधियों के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण से जुड़ी ऐसी पहलें वर्षा जल के बेहतर प्रबंधन के साथ स्थानीय परिवारों को अपनी आजीविका के साधन विकसित करने का अवसर भी प्रदान कर सकती हैं।
