पशुपालन विभाग की सलाह पर कृत्रिम गर्भाधान अपनाया, बेहतर नस्ल के पशुओं के साथ बढ़ी आमदनी और परिवार को मिला आर्थिक सहारा
अम्बिकापुर, 18 सितंबर 2026। ग्रामीण परिवारों के लिए पशुपालन आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है। बेहतर नस्ल, पशुओं की उचित देखभाल और वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाकर दुग्ध उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। सीतापुर विकासखंड के ग्राम चलता निवासी दयासागर के अनुभव में भी पशुपालन विभाग के मार्गदर्शन के बाद इसी तरह का बदलाव देखने को मिला है।
दयासागर लंबे समय से देसी गायों का पालन करते आ रहे थे। पशुपालन विभाग के अधिकारियों और मैदानी अमले ने उन्हें कृत्रिम गर्भाधान (एआई) के जरिए नस्ल सुधार की जानकारी दी। विभाग की सलाह पर उन्होंने अपनी गायों में एआई कराया। इसके बाद उनके पशुधन में बेहतर नस्ल के बछड़े-बछिया प्राप्त हुए। वर्तमान में उनके पास एचएफ, गिर और साहीवाल जैसी नस्लों की गायें भी हैं।

दुग्ध उत्पादन बढ़ने से आय को मिला सहारा
नस्ल सुधार के साथ दयासागर ने पशुओं के खान-पान, देखभाल और प्रबंधन को लेकर विभाग से मिली सलाह को भी अपनाया। उनके अनुसार, इसका असर दुग्ध उत्पादन पर पड़ा है। पहले की तुलना में अब उनके यहां प्रतिदिन करीब 15 से 20 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है।
दूध उत्पादन बढ़ने से नियमित आमदनी में भी इजाफा हुआ है। दयासागर बताते हैं कि इससे परिवार के रोजमर्रा के खर्च पूरे करने के साथ कुछ राशि बचाने में भी मदद मिल रही है।
विभागीय सलाह से बढ़ा भरोसा
दयासागर के मुताबिक, “मैं कई वर्षों से देसी गायों का पालन कर रहा था। पशु विभाग के अधिकारियों ने एआई के बारे में जानकारी दी। उनकी सलाह पर एआई कराया, जिससे अच्छी नस्ल के पशु प्राप्त हुए। विभाग की ओर से समय-समय पर मिलने वाली सलाह से पशुपालन में काफी सुविधा हुई है। पहले की तुलना में अब दूध उत्पादन और आमदनी दोनों बढ़े हैं।”
विभागीय मार्गदर्शन केवल नस्ल सुधार तक सीमित नहीं रहा। दयासागर को पशुओं की देखभाल, बेहतर प्रबंधन और पशुपालन से जुड़ी अन्य उपयोगी तकनीकों की जानकारी भी दी जाती रही। इन सुझावों को अपनाकर वे अपने पशुधन को बेहतर बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
दूसरे पशुपालकों को भी कर रहे प्रेरित
अपने अनुभव के आधार पर दयासागर अब आसपास के ग्रामीणों को भी वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका मानना है कि नस्ल सुधार, उचित देखभाल और तकनीकी मार्गदर्शन को अपनाकर पशुपालन को नियमित आय का बेहतर माध्यम बनाया जा सकता है।
दयासागर की कहानी यह दिखाती है कि पारंपरिक पशुपालन में तकनीकी जानकारी और वैज्ञानिक पद्धतियों को शामिल करने से उत्पादन और आय बढ़ाने के अवसर बन सकते हैं। पशुपालन विभाग के मार्गदर्शन के साथ उनके प्रयासों ने उनके पारंपरिक गौपालन को अधिक व्यवस्थित रूप देने में मदद की है।
