
इंडिया गठबंधन ने राष्ट्रपति को भेजा पत्र, चुनाव आयोग को सरकार के कथित हस्तक्षेप से मुक्त कराने की उठाई आवाज
अंबिकापुर, 8 अक्टूबर 2026। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर इंडिया गठबंधन ने गंभीर सवाल उठाते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र भेजा है। गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, उनके खिलाफ कार्रवाई और उनके कार्यकाल में चुनाव आयोग द्वारा लिए गए निर्णयों की समीक्षा के लिए संसदीय समिति गठित करने की मांग की है।
इंडिया गठबंधन की ओर से राष्ट्रपति को भेजे गए पत्र में आरोप लगाया गया है कि केंद्र की मोदी सरकार द्वारा चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निर्णय प्रक्रिया में कथित हस्तक्षेप किया जा रहा है। गठबंधन ने चुनाव आयोग को स्वतंत्र एवं निष्पक्ष संस्था बनाए रखने तथा उसे किसी भी राजनीतिक दबाव से मुक्त रखने की मांग की है।
चुनाव आयुक्तों की निर्णय प्रक्रिया पर उठाए सवाल

पत्र में संविधान के अनुच्छेद 324 का हवाला देते हुए कहा गया है कि चुनाव आयोग के आयुक्तों की निर्णय प्रक्रिया सामूहिक सहमति अथवा बहुमत के आधार पर होनी चाहिए। गठबंधन का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा कथित तौर पर अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
पत्र में दावा किया गया है कि इन फैसलों को लेकर अन्य चुनाव आयुक्तों की ओर से असहमति संबंधी टिप्पणियां भी दर्ज की गई हैं। गठबंधन ने इस पूरे मामले को चुनाव आयोग की संवैधानिक कार्यप्रणाली से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए इसकी जांच की मांग की है।
एसआईआर प्रक्रिया पर भी जताई आपत्ति
इंडिया गठबंधन ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर भी आपत्ति दर्ज कराई है। पत्र में दावा किया गया है कि इस प्रक्रिया के कारण बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं।
गठबंधन ने आरोप लगाया है कि एसआईआर की प्रक्रिया में अपनाई जा रही व्यवस्था से वैध मतदाताओं के मतदान के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। पत्र में यह भी दावा किया गया है कि मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल से निर्वाचन पंजीयन अधिकारियों की भूमिका और अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
हालांकि पत्र में किए गए मतदाताओं की संख्या संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि पत्र में उपलब्ध दस्तावेजों से नहीं होती है।
फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर भी विरोध

पत्र में नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में कथित बदलाव को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। इंडिया गठबंधन का कहना है कि इस बदलाव से नए और युवा मतदाताओं के लिए मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की प्रक्रिया कठिन हो सकती है।
गठबंधन ने दावा किया कि निर्वाचन संबंधी नियमों और प्रक्रियाओं में बदलाव संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप होना चाहिए और इस मामले में चुनाव आयोग की भूमिका की समीक्षा आवश्यक है।
राष्ट्रपति से संसदीय समिति बनाने की मांग
इंडिया गठबंधन ने राष्ट्रपति से मांग की है कि मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा कथित रूप से लिए गए एकतरफा निर्णयों की जांच के लिए संसदीय समिति का गठन किया जाए। साथ ही गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग भी पत्र के माध्यम से रखी है।
पत्र में चुनाव आयोग द्वारा वर्तमान कार्यप्रणाली के तहत की गई कार्रवाई की समीक्षा करने तथा यदि कोई निर्णय संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत पाया जाता है तो उस पर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की गई है।
इंडिया गठबंधन ने अपने पत्र में चुनाव आयोग की निष्पक्षता और स्वतंत्रता को लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी आवश्यकता बताते हुए कहा है कि मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना संवैधानिक संस्थाओं की सर्वोच्च जिम्मेदारी है।
