अंबिकापुर। सरगुजा जिले में शिक्षा विभाग ने तीन शासकीय शिक्षकों के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई की है। जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी आदेशों के अनुसार, कार्रवाई की जद में आए शिक्षकों में एक प्रधान पाठक हत्या के प्रयास से जुड़े आपराधिक मामले में दोषसिद्ध होकर सजा प्राप्त कर चुके हैं, जबकि दो अन्य शिक्षक कथित वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले में आरोपी हैं। इन मामलों के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और शासकीय सेवकों की जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
विभागीय आदेशों में तीनों शिक्षकों के विरुद्ध अलग-अलग परिस्थितियों के आधार पर कार्रवाई की गई है। प्रधान पाठक विजय कुमार यादव के मामले में न्यायालय से दोषसिद्धि और सजा का उल्लेख है। वहीं, प्रधान पाठक राजकुमार पैकरा तथा सहायक शिक्षक (एलबी) त्रिपाल टोप्पो के मामले में आपराधिक प्रकरण में गिरफ्तारी और न्यायिक अभिरक्षा के बाद जमानत मिलने की जानकारी दी गई है। विभाग ने संबंधित शिक्षकों के निलंबन की प्रभावशील तिथियां भी निर्धारित की हैं।
हत्या के प्रयास के मामले में प्रधान पाठक विजय कुमार यादव निलंबित
पहले मामले में विकासखंड उदयपुर के शासकीय प्राथमिक शाला पेण्डरडी में पदस्थ प्रधान पाठक विजय कुमार यादव के विरुद्ध कार्रवाई की गई है। विभागीय आदेश के अनुसार, उनके खिलाफ वर्ष 2019 में दर्ज आपराधिक प्रकरण में सुनवाई के बाद प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायालय, अंबिकापुर ने 3 जनवरी 2026 को दोषसिद्ध ठहराते हुए पांच वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी।
न्यायालय के फैसले के बाद उन्हें केंद्रीय जेल अंबिकापुर में निरुद्ध किया गया। इसके बाद उच्च न्यायालय में अपील की कार्यवाही के दौरान उन्हें जमानत मिली और 9 अक्टूबर 2026 को जेल से रिहा किया गया।
विभागीय आदेश में 3 जनवरी 2026 से 9 अक्टूबर 2026 तक की अवधि को प्रभावशील निलंबन अवधि के रूप में दर्ज किया गया है। इस मामले में कार्रवाई का आधार न्यायालय से संबंधित दोषसिद्धि और सजा का प्रकरण है।
वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में प्रधान पाठक राजकुमार पैकरा पर कार्रवाई
दूसरे मामले में प्रधान पाठक राजकुमार पैकरा को निलंबित किया गया है। विभागीय आदेश के मुताबिक, उनके विरुद्ध मणिपुर थाने में अपराध क्रमांक 132/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज है। यह प्रकरण कथित वित्तीय अनियमितता और धोखाधड़ी से संबंधित बताया गया है।
आदेश के अनुसार, राजकुमार पैकरा को 20 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद वे न्यायिक अभिरक्षा में रहे और 1 अक्टूबर 2026 को उन्हें जमानत मिली। विभाग ने 20 जुलाई 2026 से प्रभावशील निलंबन की कार्रवाई की है।
इस मामले में क्रिप्टोकरेंसी और शेयर ट्रेडिंग से जुड़े कथित वित्तीय अपराधों का उल्लेख चर्चा में है। हालांकि, उपलब्ध विवरण के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि संबंधित शिक्षक पर लगाए गए आरोपों में क्रिप्टोकरेंसी और शेयर बाजार की कौन-कौन सी गतिविधियां शामिल हैं। मामले में आरोपों को न्यायालय द्वारा सिद्ध किया जाना अभी अलग विषय है।
सहायक शिक्षक त्रिपाल टोप्पो भी निलंबित
तीसरी कार्रवाई विकासखंड उदयपुर के शासकीय प्राथमिक शाला जरहाडीह में पदस्थ सहायक शिक्षक (एलबी) त्रिपाल टोप्पो के विरुद्ध की गई है।
विभागीय आदेश के अनुसार, उनके विरुद्ध भी मणिपुर थाने में अपराध क्रमांक 132/2026 के तहत वित्तीय धोखाधड़ी से संबंधित मामला दर्ज है। उन्हें 31 अगस्त 2026 को गिरफ्तार किया गया था। बाद में 6 अक्टूबर 2026 को जमानत मिलने की जानकारी आदेश में दी गई है।
विभाग ने त्रिपाल टोप्पो का निलंबन 31 अगस्त 2026 से प्रभावशील किया है। चूंकि राजकुमार पैकरा और त्रिपाल टोप्पो के विरुद्ध एक ही अपराध क्रमांक का उल्लेख है, इसलिए दोनों की भूमिका, आरोपों का स्वरूप और मामले से संबंधित अन्य तथ्य पुलिस जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।
निलंबन अवधि में मुख्यालय निर्धारित, जीवन निर्वाह भत्ते का प्रावधान
तीनों शिक्षकों के निलंबन आदेशों में निलंबन अवधि के दौरान उनके मुख्यालय निर्धारित किए गए हैं। नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिए जाने का भी प्रावधान रखा गया है।
आदेशों में यह भी उल्लेख है कि निलंबन अवधि के दौरान संबंधित कर्मचारियों को अन्य सेवा, व्यवसाय या लाभकारी नियोजन में संलग्न नहीं होने संबंधी निर्धारित प्रमाण प्रस्तुत करना होगा। निलंबन की अवधि और उससे जुड़ी सेवा शर्तें संबंधित विभागीय आदेशों तथा लागू नियमों के अनुसार प्रभावी होंगी।
शिक्षा विभाग में कार्रवाई से बढ़ी चर्चा
एक ही जिले में तीन शासकीय शिक्षकों के विरुद्ध अलग-अलग आपराधिक मामलों के आधार पर निलंबन की कार्रवाई शिक्षा विभाग के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। खास तौर पर एक शिक्षक की दोषसिद्धि और दो अन्य शिक्षकों के विरुद्ध दर्ज कथित वित्तीय धोखाधड़ी के मामले ने इस कार्रवाई को चर्चा में ला दिया है।
हालांकि, दोनों वित्तीय मामलों में गिरफ्तारी और निलंबन को दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता। संबंधित शिक्षकों के विरुद्ध आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार होगा। वहीं, प्रधान पाठक विजय कुमार यादव के मामले में न्यायालय द्वारा सुनाई गई सजा और अपील के दौरान मिली जमानत की स्थिति को अलग-अलग समझना आवश्यक है।
फिलहाल जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी आदेशों के अनुसार तीनों शिक्षकों के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई प्रभावी की गई है। आगे की विभागीय कार्रवाई और आपराधिक मामलों की न्यायिक प्रगति पर नजर रहेगी।
