‘ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र 0.4’ के तहत अंबिकापुर से जशपुर होते हुए रांची रवाना होगी रक्षा सूत्र वाहन रैली

अंबिकापुर, 16 अगस्त। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर देश की सीमाओं की रक्षा में तैनात जवानों के प्रति सम्मान और अपनत्व का संदेश देने के लिए सरगुजा संभाग की महिलाओं और स्काउट-गाइड ने बड़ी संख्या में रक्षा सूत्र एकत्रित कर सैनिक भाइयों के लिए भेजे। ‘ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र 0.4’ के तहत अंबिकापुर के सर्किट हाउस में आयोजित कार्यक्रम में महिलाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई और अपने हाथों से तैयार रक्षा सूत्र सैनिकों के लिए समर्पित किए।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने रक्षा सूत्र भेजते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की बहनों की ओर से सीमा पर तैनात जवानों को रक्षा सूत्र भेजने की यह परंपरा लगातार चौथे वर्ष जारी है। उन्होंने कहा कि यह प्रदेश के लिए गौरव की बात है कि महिलाएं देश की रक्षा में दिन-रात जुटे सैनिक भाइयों के प्रति अपना स्नेह, सम्मान और आशीर्वाद व्यक्त कर रही हैं।

श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि जब रक्षाबंधन जैसे पर्व पर परिवार एक साथ खुशियां मनाते हैं, उस समय सैनिक भाई अपने परिवार से दूर देश की सीमाओं पर तैनात रहकर राष्ट्र की सुरक्षा का दायित्व निभाते हैं। ऐसे में बहनों की ओर से भेजा गया रक्षा सूत्र उनके लिए महज राखी नहीं, बल्कि प्रेम, सम्मान और आशीर्वाद का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इससे जवानों को यह संदेश मिलता है कि देश की माताएं, बहनें और पूरा समाज उनके साथ खड़ा है।

तीन वर्षों में भेजे गए करीब 28 लाख रक्षा सूत्र

अभियान के संयोजक एवं पूर्व सैनिक महासभा के अध्यक्ष श्री महेंद्र प्रताप सिंह राणा ने बताया कि ‘सिपाही रक्षा सूत्र’ अभियान की शुरुआत बिलासपुर से हुई थी और पिछले चार वर्षों से इसके माध्यम से देश की सीमाओं पर तैनात सैनिकों तक रक्षा सूत्र पहुंचाए जा रहे हैं। वर्ष 2023 में करीब 6 लाख 71 हजार, वर्ष 2024 में करीब 9 लाख तथा वर्ष 2025 में 12 लाख 21 हजार रक्षा सूत्र भेजे गए। इस तरह तीन वर्षों में छत्तीसगढ़ की धरती से करीब 27 लाख 92 हजार रक्षा सूत्र सैनिकों के सम्मान में भेजे जा चुके हैं।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 में अभियान का चौथा चरण ‘ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र 0.4’ के रूप में चलाया जा रहा है। इस वर्ष छत्तीसगढ़ से बाहर निकलने तक करीब 21 लाख रक्षा सूत्र एकत्र करने का लक्ष्य रखा गया है। अभियान के तहत थल सेना, नौसेना और वायुसेना के जवानों तक भी छत्तीसगढ़ की बहनों का रक्षा सूत्र पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

अंबिकापुर से जशपुर और फिर रांची जाएगी वाहन रैली

अंबिकापुर में कार्यक्रम के बाद रक्षा सूत्रों को निर्धारित मार्ग से आगे भेजा जाएगा। रक्षा सूत्रों से भरी वाहन रैली अंबिकापुर से जशपुर होते हुए रांची पहुंचेगी। इसके बाद विभिन्न माध्यमों से देश के अलग-अलग हिस्सों में तैनात सैनिकों तक ये रक्षा सूत्र पहुंचाए जाएंगे।

सैनिकों की भावनाओं का भी रखा जाता है ध्यान

अभियान के संयोजक श्री राणा ने बताया कि सैन्य इकाइयों में कई सैनिक एक साथ रहते हैं। ऐसे में यदि एक सैनिक को राखी मिले और दूसरे को न मिले तो उसके मन में भावनात्मक पीड़ा हो सकती है। इसी संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए अभियान में अधिक से अधिक सैनिकों तक रक्षा सूत्र पहुंचाने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने बताया कि कई सैनिक अपने साथी की भावनाओं का सम्मान करते हुए मिली राखी को सार्वजनिक रूप से न बांधकर सुरक्षित रखते हैं और बाद में मंदिर में जाकर उसे बांधते हैं।

उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य केवल राखियां भेजना नहीं, बल्कि सैनिकों के साथ समाज के भावनात्मक रिश्ते को मजबूत करना है। रक्षा सूत्र के माध्यम से छत्तीसगढ़ की बहनें देश की रक्षा में समर्पित जवानों के त्याग और राष्ट्रसेवा को नमन कर रही हैं।

कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती निरूपा सिंह, श्री किसन सिंह, सचिव, भूतपूर्व सैनिक महासभा, पूर्व सांसद श्री कमल भान सिंह, श्री भारत सिंह सिसौदिया, श्री विनोद हर्ष, श्रीमती अरुणा सिंह सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी, महिलाएं एवं स्काउट-गाइड की सदस्य उपस्थित रहीं।

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