अंबिकापुर, 17 अगस्त। मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर में एमबीबीएस इंटर्न द्वारा स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर जारी आंदोलन सोमवार को 14वें दिन भी जारी रहा। आंदोलन के 14वें दिन इंटर्न ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाते हुए अस्पताल की कैजुअल्टी के सामने प्रतीकात्मक रूप से ‘एमबीबीएस चायवाला’ कार्यक्रम आयोजित किया। इंटर्न ने चाय बेचकर शासन का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित किया और कहा कि चिकित्सा की लंबी एवं कठिन पढ़ाई पूरी करने के बाद अस्पताल में मरीजों की देखभाल जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने वाले इंटर्न को वर्तमान स्टाइपेंड सम्मानजनक नहीं लगता।
सोमवार को दोपहर करीब 12 बजे आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में एमबीबीएस इंटर्न शामिल हुए। हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर इंटर्न ने स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को प्रमुखता से उठाया। ‘एमबीबीएस चायवाला’ के जरिए उन्होंने यह संदेश देने का प्रयास किया कि मौजूदा स्टाइपेंड उनकी मेहनत, प्रशिक्षण, समय और अस्पताल में निभाई जा रही जिम्मेदारियों के अनुरूप पर्याप्त नहीं है।
15,900 रुपये स्टाइपेंड, 30 हजार की मांग
प्रदर्शनकारी इंटर्न के अनुसार छत्तीसगढ़ में वर्तमान में एमबीबीएस इंटर्न को 15,900 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड मिल रहा है। उनका कहना है कि देश के कई अन्य राज्यों में इंटर्न को इससे काफी अधिक स्टाइपेंड दिया जा रहा है। इंटर्न का दावा है कि कुछ राज्यों में यह राशि करीब 44 हजार रुपये या उससे अधिक प्रतिमाह है। ऐसे में छत्तीसगढ़ में भी इंटर्न के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी करते हुए इसे कम से कम 30 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाना चाहिए।
इंटर्न का कहना है कि एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद इंटर्नशिप के दौरान वे अस्पताल में मरीजों की जांच, उपचार प्रक्रिया में सहयोग, ड्यूटी, वार्ड एवं अन्य चिकित्सकीय कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कई बार उन्हें लंबे समय तक अस्पताल में रहकर अपनी जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। इसके बावजूद मिलने वाला स्टाइपेंड उनकी मेहनत और जिम्मेदारियों के अनुपात में कम है।
कई महीनों से कर रहे मांग, अब आंदोलन का 14वां दिन
इंटर्न ने बताया कि स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर पिछले कई महीनों से शासन एवं संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांग से अवगत कराया जा चुका है। उनका कहना है कि लगातार मांग रखने के बावजूद अब तक कोई सकारात्मक निर्णय नहीं होने के कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
इसी क्रम में 6 अगस्त से एमबीबीएस इंटर्न अनिश्चितकालीन शांतिपूर्ण हड़ताल एवं कार्य बहिष्कार कर रहे हैं। सोमवार को आंदोलन का 14वां दिन रहा। आंदोलन के दौरान इंटर्न अलग-अलग तरीकों से अपनी मांग शासन तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। इसी कड़ी में सोमवार को ‘एमबीबीएस चायवाला’ कार्यक्रम आयोजित किया गया।
‘चायवाला’ प्रदर्शन के जरिए दिया प्रतीकात्मक संदेश

इंटर्न ने स्पष्ट किया कि ‘एमबीबीएस चायवाला’ कार्यक्रम का उद्देश्य किसी व्यवसाय या श्रम को छोटा दिखाना नहीं है। यह केवल प्रतीकात्मक विरोध है, जिसके माध्यम से वे अपनी आर्थिक स्थिति और कम स्टाइपेंड की ओर शासन का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं।
प्रदर्शनकारी इंटर्न का कहना है कि चिकित्सा शिक्षा में कई वर्षों तक पढ़ाई और प्रशिक्षण के बाद अस्पताल में इंटर्न के रूप में वे मरीजों की सेवा और चिकित्सा व्यवस्था का हिस्सा बनते हैं। ऐसे में उन्हें उनकी मेहनत, समय और जिम्मेदारियों के अनुरूप सम्मानजनक स्टाइपेंड मिलना चाहिए।
गंभीर मरीजों की सेवाओं को प्रभावित न करने का दावा
इंटर्न ने कहा कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है। उनका प्रयास है कि आंदोलन के कारण अस्पताल की आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों। इंटर्न के अनुसार आपातकालीन एवं जीवनरक्षक सेवाओं को प्रभावित नहीं होने दिया जा रहा है और गंभीर मरीजों के उपचार में किसी तरह की बाधा न आए, इसका विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
इंटर्न ने कहा कि उनका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं अथवा आम जनता को परेशानी में डालना नहीं, बल्कि अपनी मांग को शासन तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना है। उन्होंने राज्य सरकार से मामले में जल्द सकारात्मक पहल करने और स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर निर्णय लेने का आग्रह किया।
आंदोलन समाप्त कराने के लिए जल्द निर्णय की मांग
एमबीबीएस इंटर्न का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांग को शांतिपूर्ण तरीके से उठा रहे हैं। लगातार 14 दिनों से आंदोलन जारी रहने के बावजूद अब तक समाधान नहीं निकलने से इंटर्न में निराशा है। उन्होंने सरकार से बातचीत कर उनकी मांगों पर विचार करने और स्टाइपेंड की राशि बढ़ाकर कम से कम 30 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग की है।
इंटर्न ने उम्मीद जताई कि शासन उनकी मांग पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेगा, जिससे आंदोलन समाप्त हो सके और वे पुनः नियमित रूप से अपनी इंटर्नशिप एवं मरीजों की सेवा में पूरी तरह जुट सकें।
