अंबिकापुर। शहर के बहुचर्चित अक्षत अग्रवाल हत्याकांड में करीब दो साल बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया है। सप्तम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश महेश कुमार राज की अदालत ने आरोपी संजीव मंडल उर्फ भानू बंगाली को हत्या के मामले में आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही आर्म्स एक्ट की धाराओं के तहत भी पांच वर्ष के कारावास का दंड दिया गया है।

मामला 20 अगस्त 2024 का है। अंबिकापुर के मनेंद्रगढ़ रोड निवासी अंबिका स्टील संचालक महेश केडिया के 23 वर्षीय बेटे अक्षत अग्रवाल की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अगले दिन 21 अगस्त को अक्षत का शव शहर से लगे चठिरमा जंगल में उसकी कार के भीतर मिला था। घटना के बाद पुलिस ने अंबिका स्टील के पूर्व कर्मचारी संजीव मंडल को हिरासत में लेकर जांच शुरू की थी।

पुलिस जांच के दौरान आरोपी के कब्जे और उसकी निशानदेही पर तीन पिस्टल, 31 कारतूस तथा करीब 50 हजार रुपये नकद बरामद किए गए थे। इसके अलावा मृतक की सोने की चेन, ब्रेसलेट और अंगूठी भी पुलिस को मिली थी।

आरोपी ने बताई थी अलग कहानी

पूछताछ के दौरान संजीव मंडल ने दावा किया था कि अक्षत ने खुद अपनी हत्या की सुपारी दी थी। आरोपी के अनुसार अक्षत ने कहा था कि उसकी हत्या के बाद उसके पास मौजूद नकदी और जेवर आरोपी को मिल जाएंगे।

आरोपी ने पुलिस को बताया था कि घटना के दौरान कार की ड्राइविंग सीट पर अक्षत बैठा था। उसके पास हथियार मौजूद थे और गोली चलाने की बात कही गई थी। आरोपी के मुताबिक पहली बार ट्रिगर दबाने पर गोली नहीं चली, जिसके बाद अक्षत ने खुद हथियार चलाया और गोली उसके सीने में जा लगी। इसके बाद आरोपी ने अक्षत पर दो गोलियां चलाईं।

हालांकि, पुलिस की जांच और अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर मामले में किसी तीसरे व्यक्ति की मौजूदगी की पुष्टि नहीं हुई। जांच के दौरान आरोपी का नार्को एनालिसिस, पॉलीग्राफ और ब्रेन मैपिंग टेस्ट भी कराया गया था।

33 गवाहों के बयान और साक्ष्यों पर फैसला

मामले की सुनवाई करीब दो वर्षों तक चली। इस दौरान पुलिस अधिकारियों और जवानों, फॉरेंसिक विशेषज्ञों, चिकित्सकों, परिजनों तथा दोस्तों सहित कुल 33 गवाहों के बयान अदालत में दर्ज किए गए। अभियोजन पक्ष ने घटनाक्रम से जुड़े विभिन्न साक्ष्य भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए।

अतिरिक्त लोक अभियोजक विनोद कुमार दुबे के अनुसार, अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपी को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के तहत हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही आर्म्स एक्ट की धारा 25 और 27 के तहत पांच वर्ष के कारावास का दंड भी दिया गया।

आरोपी संजीव मंडल इस मामले में करीब दो साल से जेल में बंद है। अदालत के फैसले के साथ ही लंबे समय से चर्चित इस हत्याकांड की न्यायिक प्रक्रिया में एक अहम पड़ाव आया है।

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