नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने देश की युवा पीढ़ी (Gen Z) पर विश्वास जताते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शन करना किसी व्यक्ति को एंटी-नेशनल (देशद्रोही) नहीं बनाता। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखना और असहमति व्यक्त करना संवाद की स्वस्थ परंपरा का हिस्सा है।
मोहन भागवत ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी समाज और देश के प्रति जागरूक है तथा विभिन्न मुद्दों पर अपनी राय खुलकर रखती है। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति और विरोध को राष्ट्रविरोध से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि संवाद, चर्चा और विचारों का आदान-प्रदान समाज को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक है। यदि किसी मुद्दे पर मतभेद हैं, तो उन्हें बातचीत और शांतिपूर्ण तरीके से व्यक्त करना लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करता है।
RSS प्रमुख के इस बयान को देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, लोकतांत्रिक संवाद और युवाओं की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक और सामाजिक हलकों में उनके इस वक्तव्य पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।
मुख्य बातें:
- RSS प्रमुख मोहन भागवत ने Gen Z पर जताया भरोसा।
- कहा— “विरोध प्रदर्शन करना एंटी-नेशनल होना नहीं है।”
- असहमति को लोकतांत्रिक संवाद का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
- युवाओं से सकारात्मक और रचनात्मक संवाद की अपील की।
