प्रिंटिंग दुकान से लेजर प्रिंटर, कंप्यूटर, हजारों लेबल और होलोग्राम स्टीकर बरामद; पुलिस खंगाल रही री-बॉटलिंग से बिक्री तक का पूरा नेटवर्क

राजनांदगांव। जिले में नकली शराब को वैध शराब के रूप में बाजार में खपाने की कथित तैयारी का पुलिस ने खुलासा किया है। जांच के दौरान नकली शराब की री-बॉटलिंग के बाद उस पर फर्जी लेबल और होलोग्राम लगाकर असली शराब जैसा रूप देने की योजना सामने आने की बात पुलिस ने कही है। मामले में लेबल और होलोग्राम तैयार करने से जुड़े तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दो अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

पुलिस के मुताबिक, इस नेटवर्क में शराब की बोतलों के साथ-साथ उनकी पैकिंग और पहचान से जुड़ी सामग्री भी तैयार की जा रही थी, ताकि नकली शराब को बाजार में असली ब्रांड के नाम पर खपाया जा सके।

3 हजार लेबल और 3 हजार होलोग्राम तैयार कराने की तैयारी

पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा ने प्रेस वार्ता में बताया कि जांच के दौरान छत्तीसगढ़ निर्मित जम्मू व्हिस्की के करीब 3 हजार लेबल और इतने ही होलोग्राम स्टीकर तैयार कराए जाने की जानकारी सामने आई।

पुलिस को आशंका है कि इन लेबल और होलोग्राम का इस्तेमाल नकली शराब की बोतलों को वास्तविक ब्रांड की पैकेजिंग जैसा दिखाने के लिए किया जाना था। मामले की जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि तैयार की जा रही सामग्री का अंतिम उपयोग कहां और किसके जरिए किया जाना था।

प्रिंटिंग दुकान से मशीनें और पैकेजिंग सामग्री जब्त

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने ग्राम मोहारा स्थित एक प्रिंटिंग दुकान से लेजर प्रिंटर, कंप्यूटर, मोबाइल फोन, शराब के लेबल और होलोग्राम स्टीकर सहित करीब 1.50 लाख रुपये की सामग्री जब्त की।

पुलिस के अनुसार, इससे पहले की कार्रवाई में 2,100 नग 180 एमएल प्लास्टिक बोतलें और 497 नग पौवा शराब, कुल 89.46 बल्क लीटर, के साथ पैकेजिंग से संबंधित सामग्री भी बरामद की जा चुकी है।

UPI लेनदेन से प्रिंटिंग दुकान तक पहुंची जांच

पुलिस जांच के मुताबिक, आरोपी देवव्रत वर्मा, फरार आरोपी महेन्द्र वर्मा उर्फ बड़ा कट्टी के कहने पर मोहारा स्थित डायमंड कलेक्शन के संचालक तेजेश्वर साहू की प्रिंटिंग दुकान पहुंचा था।

बताया गया है कि इसी दुकान पर शराब के लेबल और होलोग्राम स्टीकर तैयार कराने की प्रक्रिया चल रही थी। जांच के दौरान पुलिस को दोनों आरोपियों के बीच हुए कथित UPI लेनदेन के स्क्रीनशॉट भी मिले हैं।

मोबाइल और डिजिटल रिकॉर्ड खंगाल रही पुलिस

मामले की जांच अब केवल जब्त सामग्री तक सीमित नहीं है। पुलिस जब्त किए गए कंप्यूटर, प्रिंटर और मोबाइल फोन का तकनीकी एवं वैज्ञानिक परीक्षण करा रही है।

इसके अलावा आरोपियों के UPI लेनदेन, कॉल डिटेल और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि नकली लेबल और होलोग्राम तैयार होने के बाद उन्हें किन लोगों तक पहुंचाया जाना था और इनका इस्तेमाल किस स्तर पर किया जाना था।

बोतल से बाजार तक पूरी कड़ी की तलाश

पुलिस अब इस मामले में नकली शराब के संभावित पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ रही है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि शराब की री-बॉटलिंग, फर्जी लेबलिंग, होलोग्राम लगाने, पैकेजिंग, परिवहन और बिक्री में कौन-कौन लोग शामिल थे।

पुलिस के अनुसार, मामले में पहले दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दो आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं।

जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस की नजर उन लोगों पर भी है जो नकली शराब तैयार करने के लिए जरूरी बोतल, पैकेजिंग और फर्जी पहचान सामग्री उपलब्ध करा रहे थे। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों की जांच के बाद नेटवर्क से जुड़े अन्य नामों और उनकी भूमिका की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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