भरतपुर का आदेश निरस्त होने के बावजूद मनेंद्रगढ़ क्षेत्र की पंचायतों में दबाव बनाने के आरोप, जिला पंचायत प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
मनेंद्रगढ़/एमसीबी। मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में ग्राम पंचायतों द्वारा संपत्ति कर वसूली को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ पंचायत क्षेत्रों में कर जमा कराने के लिए लोगों पर दबाव बनाया जा रहा है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि संपत्ति कर जमा नहीं करने पर कुछ पात्र परिवारों को सरकारी राशन प्रभावित होने की बात कही जा रही है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र प्रशासनिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि संपत्ति कर वसूली और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के राशन को आपस में जोड़कर दबाव बनाया जा रहा है, तो यह गंभीर प्रशासनिक सवाल खड़ा करता है। लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
कई पंचायतों से शिकायतों की चर्चा
मनेंद्रगढ़ जनपद पंचायत क्षेत्र की बरबसपुर, उजियारपुर, महाराजपुर, नागपुर, लोहारी, सेमरा और लाई सहित कई पंचायतों में संपत्ति कर वसूली को लेकर ग्रामीणों के बीच नाराजगी सामने आने की बात कही जा रही है।
ग्रामीणों का दावा है कि पंचायत स्तर पर कर जमा कराने के लिए लगातार संपर्क किया जा रहा है। कुछ ग्रामीणों ने कथित तौर पर यह शिकायत की है कि कर नहीं देने पर राशन संबंधी सुविधा प्रभावित होने की बात कही गई।
यदि ऐसा हुआ है तो यह जांच का विषय है कि संबंधित कर्मचारियों अथवा पंचायत प्रतिनिधियों ने किस नियम या आदेश के आधार पर ऐसी बात कही। वहीं, प्रशासन की ओर से इस संबंध में आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आना अभी बाकी है।

भरतपुर में आदेश हुआ निरस्त
मामले में भरतपुर जनपद पंचायत से जारी एक प्रशासनिक आदेश भी चर्चा में है। जनपद पंचायत भरतपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा जारी ज्ञापन क्रमांक 1115/पं.शाखा/ज.पं./2026-27, दिनांक 08 अगस्त 2026 में पूर्व में जारी आदेश क्रमांक 627 दिनांक 01 जुलाई 2026 को तत्काल प्रभाव से निरस्त किए जाने की जानकारी दी गई है।
बताया गया कि पूर्व आदेश के माध्यम से समर्थ पंचायत पोर्टल और ग्राम संपदा ऐप में संपत्ति कर से संबंधित कार्यवाही को शत-प्रतिशत पूरा करने के निर्देश दिए गए थे।
आदेश निरस्त होने के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि जिले के दूसरे जनपद क्षेत्रों में संपत्ति कर वसूली की मौजूदा प्रक्रिया क्या है और पंचायतों को इस संबंध में वर्तमान में कौन-कौन से निर्देश प्राप्त हैं।
भरतपुर में पूर्व विधायक गुलाब कमरों द्वारा इस मुद्दे को लेकर जनआंदोलन की चेतावनी दिए जाने के बाद आदेश निरस्त किए जाने की बात भी सामने आई है। ऐसे में मनेंद्रगढ़ जनपद क्षेत्र की शिकायतों ने पूरे मामले को और चर्चा में ला दिया है।

जिला पंचायत प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल
ग्रामीणों की शिकायतों के बीच जिला पंचायत प्रशासन की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जिला पंचायत CEO अंकिता सोम से संबंधित प्रशासनिक स्तर पर यह स्पष्ट किए जाने की मांग की जा रही है कि क्या पंचायतों में संपत्ति कर वसूली की प्रक्रिया की नियमित समीक्षा की जा रही है।
ग्रामीणों का सवाल है कि यदि किसी पंचायत में कर वसूली के दौरान अनुचित दबाव या राशन बंद करने जैसी कथित चेतावनी दी जा रही है, तो इसकी शिकायत उच्च अधिकारियों तक पहुंचने के बाद क्या कार्रवाई की जा रही है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि जिला पंचायत प्रशासन ने संबंधित पंचायतों से इस विषय में कोई विस्तृत रिपोर्ट मांगी है या नहीं।

राशन और संपत्ति कर को लेकर उठे अहम सवाल
संपत्ति कर पंचायत की राजस्व व्यवस्था से संबंधित विषय है, जबकि पात्र परिवारों को खाद्यान्न उपलब्ध कराना सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत संचालित व्यवस्था है। ऐसे में दोनों व्यवस्थाओं को जोड़कर वसूली किए जाने का आरोप प्रशासन के लिए गंभीर जांच का विषय बन सकता है।
यदि किसी पात्र परिवार को केवल संपत्ति कर जमा नहीं करने के कारण खाद्यान्न से वंचित करने की धमकी दी गई है, तो इसकी वैधानिक स्थिति स्पष्ट किया जाना आवश्यक है। दूसरी ओर, यदि ऐसी शिकायतें तथ्यहीन हैं, तो प्रशासन को ग्रामीणों के बीच स्पष्ट नियम और वास्तविक प्रक्रिया की जानकारी देनी चाहिए।
प्रशासन से ग्रामीणों के 10 सवाल
1. क्या संपत्ति कर और राशन वितरण को आपस में जोड़ा जा सकता है?
2. कर जमा नहीं करने पर राशन रोकने की बात किस नियम या आदेश के तहत कही गई?
3. भरतपुर जनपद का 1 जुलाई का आदेश निरस्त होने के बाद वर्तमान दिशा-निर्देश क्या हैं?
4. मनेंद्रगढ़ जनपद की ग्राम पंचायतों में संपत्ति कर वसूली की निर्धारित प्रक्रिया क्या है?
5. संबंधित पंचायतों में अब तक कितने परिवारों से कितना कर वसूला गया?
6. क्या प्रत्येक करदाता को निर्धारित प्रक्रिया के तहत रसीद और मांग-पत्र दिया जा रहा है?
7. आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए कर भुगतान को लेकर क्या प्रावधान हैं?
8. राशन बंद करने की कथित धमकी की शिकायतों पर कोई जांच हुई है या नहीं?
9. क्या जिला पंचायत CEO ने संबंधित जनपद अथवा ग्राम पंचायतों से रिपोर्ट मांगी है?
10. प्रशासन ग्रामीणों को संपत्ति कर वसूली के वास्तविक नियम सार्वजनिक रूप से कब बताएगा?
ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की मांग की
ग्रामीणों और स्थानीय स्तर के जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि संपत्ति कर की वसूली यदि नियमानुसार की जा रही है तो उसकी पूरी प्रक्रिया स्पष्ट की जाए। साथ ही, किसी भी परिवार पर अनुचित दबाव या धमकी दिए जाने की शिकायत सामने आती है तो उसकी जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत को मिलने वाले राजस्व के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार कर वसूला जाए, लेकिन खाद्य सुरक्षा से जुड़ी सुविधाओं को दबाव बनाने का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि शिकायतों का समाधान नहीं हुआ तो उच्च अधिकारियों के समक्ष शिकायत करने के साथ आंदोलन का रास्ता अपनाया जा सकता है।
अब प्रशासन के जवाब का इंतजार
भरतपुर जनपद में पूर्व आदेश के निरस्त होने और मनेंद्रगढ़ क्षेत्र की पंचायतों में कथित दबाव की शिकायतों के बाद अब निगाह जिला पंचायत प्रशासन पर है।
मुख्य सवाल यही है कि क्या प्रशासन संबंधित पंचायतों से तथ्यात्मक रिपोर्ट लेकर पूरे मामले की जांच करेगा? क्या राशन और संपत्ति कर को लेकर ग्रामीणों के बीच बनी असमंजस की स्थिति दूर की जाएगी? और यदि वसूली में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होगी?
इन सवालों के जवाब प्रशासन की जांच और आधिकारिक स्पष्टीकरण के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।

