जशपुर। ग्राम पंचायत जशपुर में पंचायत भवन के समीप स्कूल एवं पंचायत परिसर से लगी शासकीय भूमि पर निर्मित दुकानों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मामले को लेकर पंचायत के वार्ड पंचों ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) जशपुर के समक्ष लिखित शिकायत प्रस्तुत कर दुकानों के निर्माण, स्वामित्व एवं आवंटन प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है।
वार्ड पंचों द्वारा सौंपे गए आवेदन में आरोप लगाया गया है कि पंचायत भवन के पास शासकीय भूमि पर कुछ दुकानों का निर्माण किया गया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इन दुकानों के निर्माण एवं आवंटन से संबंधित स्पष्ट जानकारी ग्राम पंचायत के उपलब्ध अभिलेखों में दर्ज नहीं है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि शासकीय भूमि पर दुकानों के निर्माण की अनुमति किस आधार पर दी गई और उनका आवंटन किस प्रक्रिया के तहत किया गया।

निर्माण अनुमति और आवंटन की जांच की मांग
वार्ड पंचों ने एसडीएम (राजस्व) से दुकानों के निर्माण से संबंधित भूमि स्वामित्व, निर्माण अनुमति, पंचायत प्रस्ताव, प्रशासनिक स्वीकृति, आवंटन प्रक्रिया सहित अन्य संबंधित दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है। साथ ही यह भी जांच करने का आग्रह किया गया है कि निर्माण एवं दुकान आवंटन शासन द्वारा निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुरूप हुआ है या नहीं।
पंचायत अभिलेख में रिकॉर्ड नहीं होने का दावा
शिकायत में प्रमुख रूप से यह बात सामने रखी गई है कि संबंधित दुकानों के निर्माण एवं आवंटन से जुड़ी आवश्यक जानकारी पंचायत अभिलेखों में उपलब्ध नहीं होने का दावा किया जा रहा है। यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है, तो शासकीय भूमि के उपयोग और सार्वजनिक संपत्ति के आवंटन की प्रक्रिया को लेकर गंभीर प्रशासनिक सवाल खड़े हो सकते हैं।
वार्ड पंचों ने मांग की है कि जांच के दौरान यदि किसी प्रकार की अनियमितता, नियमविरुद्ध निर्माण अथवा अवैध आवंटन सामने आता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए तथा शासकीय भूमि को सुरक्षित कराया जाए।
पारदर्शिता को लेकर उठे सवाल
वार्ड पंचों का कहना है कि ग्राम पंचायत की भूमि और सार्वजनिक संपत्तियां ग्रामीणों की सामूहिक संपत्ति हैं। ऐसे में इनके उपयोग, निर्माण और आवंटन की प्रक्रिया में पारदर्शिता आवश्यक है। उन्होंने मांग की है कि दुकानों के आवंटन से संबंधित पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक की जाए और पात्र व्यक्तियों को निर्धारित नियमों के तहत पारदर्शी प्रक्रिया से ही दुकानें आवंटित की जाएं।
अब पूरे मामले में राजस्व विभाग की जांच और पंचायत अभिलेखों के सत्यापन पर नजर बनी हुई है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित दुकानों का निर्माण एवं आवंटन नियमानुसार हुआ है अथवा इसमें किसी प्रकार की अनियमितता बरती गई है।
वार्ड पंचों ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष का विरोध करना नहीं, बल्कि शासकीय भूमि एवं पंचायत की संपत्ति का संरक्षण तथा पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

