मजदूर मां की बेटी ने घर पर चार साल की मेहनत से पाई सफलता, मेडिकल कॉलेज जगदलपुर में मिला प्रवेश; डीएमएफ से 2.50 लाख रुपये की सहायता स्वीकृत
अंबिकापुर। आर्थिक तंगी, शारीरिक चुनौतियां और सीमित संसाधन भी सरगुजा की आदिवासी बेटी पूजा सिंह के हौसले को नहीं डिगा सके। सीतापुर विकासखंड के ग्राम राधापुर की रहने वाली 66 प्रतिशत दिव्यांग पूजा ने घर पर रहकर चार वर्षों तक NEET की तैयारी की और वर्ष 2026 में सफलता हासिल कर मेडिकल कॉलेज जगदलपुर में प्रवेश पाया। मेडिकल की पढ़ाई के खर्च की चुनौती को देखते हुए जिला प्रशासन ने डीएमएफ मद से शिक्षण शुल्क के लिए 2 लाख 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की है।

मां ने मजदूरी कर बेटी की पढ़ाई को रखा जारी
पूजा का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। उनके पिता दूसरी शादी के बाद अलग रहते हैं, जिसके चलते परिवार की जिम्मेदारी मुख्य रूप से उनकी मां के कंधों पर है। परिवार के पास अपनी कृषि भूमि भी नहीं है। ऐसे में पूजा की मां दूसरों के खेतों में मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करती हैं और इसी सीमित आय से बेटी की पढ़ाई जारी रखी।
आर्थिक परेशानियों के बावजूद पूजा ने डॉक्टर बनने का लक्ष्य नहीं छोड़ा। बड़े शहर में रहकर महंगी कोचिंग लेना संभव नहीं था, इसलिए उन्होंने घर पर रहकर ही प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने का फैसला किया।
सरकारी स्कूल से पढ़ाई, घर से NEET की तैयारी
पूजा ने अपनी शुरुआती पढ़ाई ग्राम राधापुर में पूरी की। इसके बाद उन्होंने शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सीतापुर से हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी की पढ़ाई की। वर्ष 2022 में उन्होंने कक्षा 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की।
इसके बाद उन्होंने वर्ष 2022 से 2026 तक लगातार चार वर्षों तक घर पर रहकर NEET की तैयारी की। 66 प्रतिशत दिव्यांगता और आर्थिक सीमाओं के बीच लगातार पढ़ाई करते हुए उन्होंने आखिरकार अपने लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की।
NEET में सफलता के बाद जगदलपुर मेडिकल कॉलेज में प्रवेश
पूजा की मेहनत का परिणाम वर्ष 2026 में सामने आया। उन्होंने NEET परीक्षा उत्तीर्ण की और काउंसलिंग प्रक्रिया के माध्यम से मेडिकल कॉलेज जगदलपुर में प्रवेश प्राप्त किया। गांव के सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई करते हुए मेडिकल कॉलेज तक पहुंचना पूजा और उनके परिवार के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
डीएमएफ से मिली आर्थिक मदद
मेडिकल शिक्षा का खर्च पूजा की आर्थिक स्थिति वाले परिवार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता था। उनकी परिस्थितियों को देखते हुए कलेक्टर अजीत वसंत ने डीएमएफ मद से शिक्षण शुल्क के लिए 2.50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की है।
कलेक्टर ने पूजा की सफलता की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। प्रशासन की ओर से मिली यह सहायता पूजा के लिए मेडिकल की पढ़ाई जारी रखने में आर्थिक सहारा बनेगी।
संघर्ष से सफलता तक पहुंची पूजा की कहानी
पूजा की कहानी में एक ओर मां की मेहनत है, जिन्होंने मजदूरी कर परिवार को संभाला, तो दूसरी ओर बेटी का वह संकल्प है जिसने विपरीत परिस्थितियों में भी डॉक्टर बनने का सपना नहीं छोड़ा। चार साल तक घर पर रहकर की गई तैयारी के बाद NEET में सफलता और मेडिकल कॉलेज में प्रवेश उनके संघर्ष का परिणाम है।
आर्थिक सहायता मिलने के बाद अब पूजा के सामने डॉक्टर बनने की राह में एक बड़ी आर्थिक चुनौती कम हुई है। उनकी सफलता सीमित संसाधनों के बीच प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए भी एक प्रेरक उदाहरण के रूप में सामने आई है।
