अंबिकापुर, 7 अगस्त। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने प्रदेशवासियों से स्वदेशी उत्पादों को अपनाने और हथकरघा से निर्मित वस्तुओं का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक शिल्पकला और लाखों बुनकर परिवारों के सम्मान से जुड़ा जन आंदोलन है।

मंत्री श्री अग्रवाल ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के बुनकरों द्वारा निर्मित पारंपरिक गमछा धारण कर प्रदेश की समृद्ध हथकरघा परंपरा को सम्मान दिया। उन्होंने कहा कि यह गमछा केवल एक परिधान नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान, श्रम, परंपरा और स्थानीय शिल्प कौशल का जीवंत प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि जब नागरिक स्थानीय बुनकरों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों का उपयोग करते हैं, तो इससे न केवल बुनकरों की आजीविका मजबूत होती है, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण को भी बल मिलता है। प्रत्येक व्यक्ति का छोटा-सा प्रयास आत्मनिर्भर भारत के निर्माण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के बुनकर अपनी पारंपरिक कला, उत्कृष्ट शिल्पकौशल और रचनात्मकता के माध्यम से प्रदेश की पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित कर रहे हैं। ऐसे प्रतिभाशाली शिल्पकारों का सम्मान और प्रोत्साहन देना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस अभियान के तहत लोगों से अपने पसंदीदा हथकरघा उत्पाद के साथ फोटो या वीडियो साझा करने और अभियान से जुड़ने की भी अपील की। उनका कहना था कि इससे देश-दुनिया तक भारतीय हथकरघा की समृद्ध परंपरा और बुनकरों की मेहनत को नई पहचान मिलेगी।

मंत्री राजेश अग्रवाल ने विश्वास जताया कि प्रदेशवासी ‘वोकल फॉर लोकल’ के संकल्प को मजबूत करते हुए स्वदेशी अपनाने के अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएंगे और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपना योगदान देंगे।

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