अंबिकापुर, 20 अगस्त 2026। घुनघुटा जलाशय में बाढ़ जैसी आपदा से निपटने की तैयारियों को परखने और आम लोगों को बचाव के जरूरी उपायों की जानकारी देने के लिए जिला स्तरीय संयुक्त मॉक ड्रिल आयोजित की गई। 03 वाहिनी एनडीआरएफ, मुंडली (कटक, ओडिशा) की टीम ने जिला प्रशासन और विभिन्न विभागों के साथ मिलकर रेस्क्यू ऑपरेशन, प्राथमिक उपचार, सीपीआर सहित कई बचाव तकनीकों का व्यावहारिक प्रदर्शन किया।
मॉक ड्रिल एनडीआरएफ के डिप्टी कमांडर लिटेन विश्वास के मार्गदर्शन और सब-इंस्पेक्टर विकास सैनी के नेतृत्व में हुई। अभ्यास के दौरान यह दिखाया गया कि यदि घुनघुटा जलाशय में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो और लोग किसी टापू पर फंस जाएं, तो प्रशासन और बचाव दल किस तरह तत्काल कार्रवाई करेंगे।
टापू पर फंसे लोगों का किया गया रेस्क्यू

मॉक ड्रिल के तहत जलाशय में काल्पनिक आपदा की स्थिति बनाई गई। सूचना मिलने के बाद एनडीआरएफ और संबंधित बचाव दल ने नाव के जरिए मौके पर पहुंचकर टापू पर फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभ्यास किया।
रेस्क्यू के दौरान कुछ लोगों के घायल होने की स्थिति भी प्रदर्शित की गई। घायलों को सुरक्षित स्थान पर लाकर बनाए गए मेडिकल पोस्ट में प्राथमिक उपचार देने और आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया समझाई गई। इससे बचाव कार्य के साथ तत्काल मेडिकल सहायता की पूरी व्यवस्था का अभ्यास हुआ।
फ्लाइंग फॉक्स से बचाव का प्रदर्शन

मॉक ड्रिल में एनडीआरएफ की टीम ने फ्लाइंग फॉक्स तकनीक का भी प्रदर्शन किया। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों या जलभराव वाले ऐसे स्थानों से लोगों को निकालने की प्रक्रिया बताई गई, जहां सामान्य तरीके से पहुंचना संभव नहीं हो।
टीम ने ग्रामीणों और संबंधित विभागों के कर्मचारियों को बचाव उपकरणों के उपयोग की जानकारी भी दी, ताकि जरूरत पड़ने पर तकनीकी संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल किया जा सके।
घर में मौजूद सामान भी बन सकता है मददगार
अभ्यास के दौरान एनडीआरएफ टीम ने यह भी बताया कि आपदा के समय यदि तत्काल बचाव उपकरण उपलब्ध न हों, तो कुछ सामान्य घरेलू वस्तुओं का उपयोग शुरुआती बचाव के लिए किया जा सकता है। खाली पानी की बोतल, प्लास्टिक के डिब्बे और जरीकैन जैसी तैरने वाली वस्तुओं के माध्यम से पानी में डूबने से बचाव के प्राथमिक उपायों का प्रदर्शन किया गया।
टीम ने लोगों को आपदा के दौरान घबराने के बजाय सुरक्षित तरीके से उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करने और दूसरों की मदद करने के बारे में जागरूक किया।
सीपीआर की दी गई ट्रेनिंग

मॉक ड्रिल में सीपीआर का भी व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। एनडीआरएफ और मेडिकल टीम ने बताया कि किसी व्यक्ति के अचानक बेहोश होने या सांस और हृदय की गतिविधि रुकने जैसी स्थिति में समय पर सीपीआर देना बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है।
अधिकारियों, कर्मचारियों, स्काउट-गाइड और ग्रामीणों को सीपीआर की प्रक्रिया का प्रदर्शन कर इसके महत्व की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने कहा कि आपदा प्रबंधन केवल सरकारी बचाव एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है। आम नागरिकों को भी प्राथमिक बचाव और जीवन रक्षक तकनीकों की जानकारी होना जरूरी है।
कई विभागों ने एक साथ परखी अपनी तैयारियां

मॉक ड्रिल के दौरान पुलिस प्रशासन, जल संसाधन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, वन विभाग, शिक्षा विभाग, होमगार्ड, एनसीसी, स्काउट-गाइड और अन्य संबंधित विभागों ने अपनी भूमिकाओं का अभ्यास किया।
आपदा की सूचना मिलने, बचाव दल के मौके पर पहुंचने, प्रभावित लोगों की सुरक्षित निकासी, घायलों को प्राथमिक उपचार देने और लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से प्रदर्शित किया गया। साथ ही विभिन्न विभागों के पास उपलब्ध संसाधनों और उपकरणों की कार्यक्षमता भी परखी गई।
अधिकारियों ने बताया मॉक ड्रिल का महत्व

अपर कलेक्टर एवं मॉक ड्रिल के नोडल अधिकारी सुनील नायक ने कहा कि इस अभ्यास का उद्देश्य आपदा आने से पहले ही प्रशासन, बचाव एजेंसियों और स्थानीय लोगों को तैयार करना है। नियमित प्रशिक्षण से आपात स्थिति में घबराहट कम होती है और बचाव कार्य तेजी से किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की सहभागिता इस अभ्यास की महत्वपूर्ण कड़ी रही।
एनडीआरएफ के डिप्टी कमांडर लिटेन विश्वास ने बताया कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देशों के अनुरूप इस तरह के अभ्यास कर जिला स्तर पर विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की स्थिति को परखा जाता है। उन्होंने कहा कि बाढ़ जैसी आपदा के दौरान रेस्क्यू, सुरक्षित निकासी, प्राथमिक उपचार, सीपीआर और वैकल्पिक बचाव तकनीकों का नियमित अभ्यास वास्तविक घटना के समय काफी उपयोगी साबित होता है।
मॉक ड्रिल में कलेक्टर अजीत वसंत, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश अग्रवाल, अपर कलेक्टर सुनील नायक, एनडीआरएफ के डिप्टी कमांडर लिटेन विश्वास, डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट फायर एसके कठौतिया सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। बड़ी संख्या में ग्रामीण, सरपंच, स्कूली बच्चे, स्काउट-गाइड और संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी भी अभ्यास में शामिल हुए।
