रात होते ही अंबिकापुर का रिंग रोड अंधेरे के हवाले… सड़क पर गड्ढे, गड्ढों पर गाड़ियां और बीच सड़क पर मवेशी। सवाल यह है कि जब राहगीरों को सब कुछ नजर नहीं आ रहा, तो जिम्मेदारों को यह अव्यवस्था क्यों नजर नहीं आ रही?
खरसिया चौक से बौरिपारा तक अंधेरा, हादसे का खतरा बढ़ा

जितेन्द्र विन्दु / अंबिकापुर। शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से बनाए गए रिंग रोड की जमीनी हकीकत इन दिनों सवाल खड़े कर रही है। शहर के कई हिस्सों में रात के समय स्ट्रीट लाइटें बंद रहने की शिकायतें सामने आ रही हैं। खासकर खरसिया चौक से बौरिपारा तक रिंग रोड पर लगी स्ट्रीट लाइटें बंद होने से रात में यह पूरा मार्ग अंधेरे में डूब जाता है।
शहरवासियों के लिए यह स्थिति किसी परेशानी से कम नहीं है। एक ओर सड़क पर जगह-जगह गड्ढे हैं, दूसरी ओर रात के समय रोशनी का इंतजाम नहीं है। ऐसे में वाहन चालकों को सड़क की वास्तविक स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। कई बार अचानक सामने आए गड्ढे से बचने के प्रयास में वाहन चालक संतुलन खो सकते हैं।
गड्ढे हैं या सड़क, पहचानना मुश्किल
शहर की खराब सड़कें पहले ही लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं। रिंग रोड पर जगह-जगह बने गड्ढे इस परेशानी को और बढ़ा रहे हैं। दिन में तो किसी तरह वाहन चालक गड्ढों को देखकर बचने का प्रयास कर लेते हैं, लेकिन रात में बंद स्ट्रीट लाइट के कारण स्थिति बेहद खतरनाक हो जाती है।
व्यंग्यात्मक सवाल यह भी है कि सड़क पर गड्ढे इतने ज्यादा हैं कि वाहन चालक रास्ता ढूंढ रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग को शायद गड्ढे दिखाई देने के लिए भी स्ट्रीट लाइट की जरूरत पड़ रही है।
सड़क पर मवेशी, ऊपर से अंधेरा

रिंग रोड की एक और बड़ी समस्या सड़क पर बैठे मवेशी हैं। दिन-रात कई जगह मवेशी सड़क पर बैठे नजर आते हैं। दिन में वाहन चालक किसी तरह उन्हें देखकर अपना रास्ता बदल लेते हैं, लेकिन रात के अंधेरे में यही मवेशी अचानक वाहन के सामने आ जाएं तो हादसा होने में देर नहीं लगती।
खासकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह स्थिति बेहद जोखिम भरी है। तेज रफ्तार में अचानक सड़क पर बैठे मवेशी दिखाई देने पर वाहन चालक के पास संभलने के लिए पर्याप्त समय नहीं रहता।
लाइट बंद, जिम्मेदारी भी बंद?

शहरवासियों का सवाल है कि अगर रिंग रोड की स्ट्रीट लाइटें लंबे समय से बंद हैं, तो आखिर इनके रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी है? क्या संबंधित विभाग की ओर से नियमित निरीक्षण नहीं किया जाता? और यदि निरीक्षण होता है तो फिर बंद पड़ी लाइटें अब तक दुरुस्त क्यों नहीं हुईं?
लोगों में चर्चा है कि सड़क की लाइटें तो बंद हैं, लेकिन समस्या को लेकर जिम्मेदारों की आंखों पर भी कहीं अंधेरा तो नहीं छाया हुआ है?
अंधेरे का फायदा उठा सकती हैं असामाजिक गतिविधियां
रात के समय सुनसान और अंधेरे मार्ग लोगों की सुरक्षा के लिहाज से भी चिंता का विषय बन जाते हैं। स्ट्रीट लाइट बंद होने से दुर्घटना का खतरा तो बढ़ता ही है, साथ ही असामाजिक गतिविधियों और अप्रिय घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है।
देर रात इस मार्ग से गुजरने वाले लोगों, खासकर महिलाओं और दोपहिया वाहन चालकों को अंधेरे के कारण अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है।
नगर निगम प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों ने नगर निगम और संबंधित विभाग से मांग की है कि खरसिया चौक से बौरिपारा तक बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों को तत्काल दुरुस्त कराया जाए। इसके साथ ही शहर की खराब सड़कों और गड्ढों की मरम्मत कराने तथा रिंग रोड पर बैठे मवेशियों की समस्या का स्थायी समाधान करने के लिए भी प्रभावी कार्रवाई की जाए।
लोगों का कहना है कि सड़क, स्ट्रीट लाइट और मवेशियों की समस्या कोई नई समस्या नहीं है। यदि समय रहते इन पर ध्यान दिया जाए तो दुर्घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
हादसे के बाद जागेगा प्रशासन या पहले होगी कार्रवाई?

शहरवासियों का कहना है कि किसी बड़े हादसे के बाद मौके पर पहुंचकर निरीक्षण करने से बेहतर है कि हादसा होने से पहले ही व्यवस्था को दुरुस्त कर दिया जाए। रिंग रोड शहर का महत्वपूर्ण मार्ग है और यहां रोजाना बड़ी संख्या में छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं।
ऐसे में सवाल सीधा है—क्या प्रशासन किसी गंभीर हादसे का इंतजार कर रहा है?
शहरवासियों की मांग है कि नगर निगम और संबंधित विभाग तत्काल मौके का निरीक्षण करे, बंद स्ट्रीट लाइटों को चालू कराए, खराब सड़कों की मरम्मत कराए और सड़क पर बैठे मवेशियों को हटाने के लिए ठोस व्यवस्था बनाए।
क्योंकि सड़क पर अंधेरा हो तो गड्ढा दिखाई नहीं देता, गड्ढा हो तो रास्ता दिखाई नहीं देता और मवेशी बैठे हों तो खतरा दिखाई नहीं देता। अब देखना यह है कि जिम्मेदारों को यह सब कब दिखाई देता है।
