स्व-सहायता समूह से ₹70 हजार का ऋण लेकर शुरू किया मक्का उत्पादन, घर से ही हो रही उपज की बिक्री

अम्बिकापुर, 24 अगस्त 2026। ग्रामीण महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में ‘बिहान’ महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। समूह के माध्यम से महिलाओं को बचत, ऋण और आजीविका गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत सकालो की रहने वाली माया विश्वास की कहानी इसी बदलाव की मिसाल है।

माया विश्वास ‘काली माई’ स्व-सहायता समूह से जुड़ी हैं। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने कृषि को अपनी आजीविका का माध्यम बनाया। उन्होंने समूह से ₹70 हजार का ऋण लेकर मक्का उत्पादन शुरू किया। मक्का की खेती से उन्हें आय का अतिरिक्त साधन मिला है और परिवार की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आया है।

माया बताती हैं कि पहले परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी और आय के सीमित साधनों के कारण घरेलू जरूरतें पूरी करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें छोटे-छोटे ऋण प्राप्त हुए, जिनका उपयोग उन्होंने कृषि गतिविधियों को आगे बढ़ाने में किया।

मक्का उत्पादन से होने वाली आमदनी से परिवार की दैनिक जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल रही है। खास बात यह है कि उनकी उपज की बिक्री के लिए कई बार खरीदार सीधे उनके घर पहुंच जाते हैं। इससे उन्हें बाजार तक जाने के परिवहन खर्च और समय दोनों की बचत होती है।

माया ने बताया कि समूह से मिले आर्थिक सहयोग ने उन्हें अपनी आजीविका मजबूत करने और स्वयं आय अर्जित करने का अवसर दिया। समूह की अन्य महिलाओं के साथ मिलकर काम करने से उन्हें आत्मविश्वास भी मिला है। अब वह अपनी कृषि गतिविधि को और विस्तार देने के लिए प्रयासरत हैं।

माया विश्वास ने अपनी सफलता का श्रेय स्व-सहायता समूह और बिहान से मिले अवसरों को दिया। उन्होंने कहा कि समूह के माध्यम से उन्हें आर्थिक गतिविधि शुरू करने और उसे आगे बढ़ाने का अवसर मिला, जिसके परिणामस्वरूप आज वे ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं।

उन्होंने ग्रामीण महिलाओं से भी स्व-सहायता समूहों से जुड़कर उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने की अपील की। माया ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।

समूह से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा कदम

माया विश्वास की कहानी बताती है कि स्व-सहायता समूह केवल बचत और ऋण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को स्थायी आजीविका से जोड़ने का प्रभावी माध्यम भी बन रहे हैं। समूह से मिले आर्थिक सहयोग का उपयोग कर महिलाएं कृषि सहित विभिन्न गतिविधियों के जरिए अपनी आय बढ़ा रही हैं। माया ने भी मक्का उत्पादन को अपनी आजीविका का आधार बनाकर आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाया है।

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