चिरगुड़ा में स्वीकृत काम शिकायतों के बाद ठप, ग्रामीणों ने कलेक्टर से पूछा—पीढ़ियों से जहां होता आया अंतिम संस्कार, उसी जमीन पर अब आपत्ति क्यों?
बैकुंठपुर। कोरिया जिले की ग्राम पंचायत चिरगुड़ा में मुक्तिधाम निर्माण का मामला अब प्रशासन के समक्ष पहुंच गया है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से अंतिम संस्कार के लिए इस्तेमाल हो रही जमीन पर मुक्तिधाम निर्माण का प्रस्ताव ग्रामसभा में पारित किया गया था। इसके बाद प्रशासनिक स्वीकृति भी मिली और निर्माण के लिए राशि स्वीकृत किए जाने की जानकारी है। बावजूद इसके शिकायतों के चलते निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
निर्माण में आ रही कथित बाधाओं को लेकर सरपंच और ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मामले की जांच कराने तथा स्वीकृत निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग की है।

राजस्व रिकॉर्ड में ‘मरघट मद’ का उल्लेख
ग्रामीणों के मुताबिक, प्रस्तावित स्थल वर्ष 1947-48 के राजस्व अभिलेखों में ‘मरघट मद’ के रूप में दर्ज है। ग्रामीणों का दावा है कि इसी स्थान पर लंबे समय से गांव में होने वाली मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार की परंपरा चली आ रही है।
ग्रामीणों का सवाल है कि जब जमीन का राजस्व रिकॉर्ड मौजूद है और ग्रामसभा ने भी मुक्तिधाम निर्माण के पक्ष में प्रस्ताव पारित किया है, तो निर्माण कार्य में बाधा क्यों आ रही है। उनका कहना है कि मामले में राजस्व रिकॉर्ड, मौके की स्थिति और ग्रामसभा के प्रस्ताव की जांच कर स्पष्ट निर्णय लिया जाना चाहिए।
स्वीकृति के बाद शिकायत बनी अड़चन
ग्रामीणों के अनुसार मरघट मद की भूमि से लगी शासकीय जमीन पर मुक्तिधाम निर्माण प्रस्तावित किया गया है। पंचायत का दावा है कि संबंधित निजी भूमि स्वामियों की ओर से भी निर्माण को लेकर कोई आपत्ति नहीं जताई गई है।
हालांकि, बाद में सामने आई शिकायतों के कारण निर्माण कार्य प्रभावित होने की बात कही जा रही है। ज्ञापन में ईश्वरदीन की पुत्री पर निर्माण में बाधा डालने का आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि सरपंच और ग्रामीणों को एफआईआर में फंसाने की धमकी दी गई। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में मामले की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
वैकल्पिक स्थल पर भी ग्रामीणों को आपत्ति
मामले में चिरगुड़ा के आश्रित ग्राम कोचिला के खरानाला क्षेत्र में वैकल्पिक मुक्तिधाम बनाने का सुझाव दिए जाने की बात सामने आई है। ग्रामीणों ने इस विकल्प पर भी सवाल उठाए हैं।
उनका कहना है कि प्रस्तावित वैकल्पिक स्थल के आसपास नाले में पानी का बहाव रहता है और पर्याप्त शासकीय जमीन उपलब्ध होने को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। आसपास निजी जमीन होने के कारण भविष्य में विवाद की आशंका भी ग्रामीणों ने जताई है।
देवस्थान के पास मुक्तिधाम बनाने का विरोध
ग्रामीणों के अनुसार पनभरवा तालाब के पास मुक्तिधाम बनाने का विकल्प भी सामने आया था। लेकिन इस स्थल पर ग्रामीणों की धार्मिक आस्था से जुड़ा देवस्थान होने का हवाला देते हुए उन्होंने इसका विरोध किया है।
ग्रामीणों का कहना है कि मुक्तिधाम के लिए ऐसा स्थान चुना जाना चाहिए जहां अंतिम संस्कार की सुविधा के साथ स्थानीय लोगों की आस्था और भविष्य की भूमि संबंधी स्थिति को भी ध्यान में रखा जाए।
अधिकारी कर चुके हैं स्थल निरीक्षण
ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया है कि जनपद स्तर के अधिकारियों द्वारा मौके का निरीक्षण भी किया जा चुका है। इसके बावजूद निर्माण को लेकर अंतिम निर्णय सामने नहीं आने से ग्रामीणों की परेशानी बनी हुई है।
पीताम्बर राम देवांगन ने कहा कि जिस स्थान पर पीढ़ियों से अंतिम संस्कार होता आया है और जो राजस्व रिकॉर्ड में मरघट मद के रूप में दर्ज है, वहां स्वीकृत मुक्तिधाम का निर्माण कराया जाना चाहिए।
वहीं लोकेश प्रताप राजवाड़े ने राजस्व अभिलेखों और मौके की वास्तविक स्थिति के आधार पर निर्णय लेने की मांग की।
बन्धुराम यादव का कहना है कि ग्रामीणों को किसी विवाद की नहीं, बल्कि अंतिम संस्कार के लिए व्यवस्थित और सम्मानजनक सुविधा की जरूरत है। उनका कहना है कि यदि शासन स्तर से निर्माण स्वीकृत हो चुका है तो संबंधित शिकायतों का निराकरण कर कार्य को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
अब प्रशासनिक फैसले पर टिकी नजर
चिरगुड़ा का मामला अब केवल मुक्तिधाम निर्माण का नहीं, बल्कि राजस्व रिकॉर्ड, ग्रामसभा के प्रस्ताव, स्वीकृत निर्माण और स्थानीय आपत्तियों के बीच संतुलन का भी बन गया है।
ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन सभी दस्तावेजों और मौके की स्थिति की निष्पक्ष जांच कर स्थिति स्पष्ट करे। इसके बाद तय किया जाए कि स्वीकृत स्थल पर निर्माण कराया जाना है या किसी अन्य स्थान का चयन किया जाएगा।
फिलहाल ग्रामीणों की नजर कलेक्टर के निर्णय पर टिकी है। मामला शिकायतों और दावों से जुड़ा होने के कारण अंतिम स्थिति प्रशासनिक जांच और उपलब्ध राजस्व अभिलेखों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
