जिला शिक्षा अधिकारी ने निजी विद्यालयों के प्राचार्यों की बैठक में शैक्षणिक गुणवत्ता, अनुशासन और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर दिया जोर
अंबिकापुर, 13 सितंबर 2026। कलेक्टर अजीत वसंत के निर्देश पर निजी विद्यालयों के सुचारू संचालन और शासन के निर्देशों के पालन को लेकर जिला स्तरीय बैठक आयोजित की गई। जिला शासकीय बहुउद्देशीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, अंबिकापुर में आयोजित बैठक की अध्यक्षता जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. दिनेश झा ने की। बैठक में सेवा संकल्प अभियान, विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता, विद्यालयों की मान्यता शर्तों और शासन की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर प्राचार्यों एवं प्रबंधकों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

17 सितंबर से शुरू होगा सेवा संकल्प अभियान
जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि सेवा संकल्प अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक संचालित किया जाएगा। उन्होंने सभी निजी विद्यालयों में शिक्षकों और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अभियान के तहत विद्यालय, संकुल, विकासखंड और जिला स्तर पर निबंध, भाषण, रंगोली, गायन एवं लेखन सहित विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।
उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रत्येक स्तर पर सम्मानित करने के साथ ही अभियान के दौरान जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित करने और मशाल रैली आयोजित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि निर्धारित कार्ययोजना के अनुसार सभी गतिविधियों का प्रभावी संचालन किया जाए और अभियान में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
मान्यता की शर्तों के अनुरूप संचालित हों निजी स्कूल
डॉ. झा ने कहा कि जिले में बड़ी संख्या में विद्यार्थी निजी विद्यालयों में अध्ययनरत हैं। ऐसे में निजी स्कूलों की जिम्मेदारी केवल बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और शासन की योजनाओं का लाभ उन तक पहुंचाना भी जरूरी है।
उन्होंने सभी निजी विद्यालयों को अपनी मान्यता की शर्तों, विभागीय आदेशों-निर्देशों और प्रस्तुत शपथ पत्र के अनुरूप विद्यालय संचालित करने को कहा। साथ ही विद्यार्थियों के लिए आवश्यक सुविधाओं, अनुशासन और शैक्षणिक वातावरण को बेहतर बनाने पर जोर दिया।
बोर्ड परीक्षा परिणाम में सुधार पर जोर

बैठक में पिछले सत्र के परीक्षा परिणामों की भी समीक्षा की गई। जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा कि निजी विद्यालयों का परीक्षा परिणाम शासकीय विद्यालयों की तुलना में करीब 3 से 4 प्रतिशत कम रहा है। उन्होंने आगामी बोर्ड परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए विद्यालयों को पहले से कार्ययोजना तैयार करने और कमजोर विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि अभिभावक अपनी मेहनत की कमाई का बड़ा हिस्सा बच्चों की फीस के रूप में खर्च करते हैं। ऐसे में विद्यालय प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले और उनके परीक्षा परिणाम में लगातार सुधार हो।
धर्म और जाति के आधार पर भेदभाव नहीं
जिला शिक्षा अधिकारी ने विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों से विद्यार्थियों के साथ संवेदनशील एवं समान व्यवहार करने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बच्चों के साथ धर्म या जाति के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। सभी विद्यार्थियों को समान अवसर और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
उन्होंने शिक्षा के साथ बच्चों के स्वास्थ्य, सुरक्षा, अनुशासन और व्यक्तित्व विकास पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
नियमित समीक्षा में प्रस्तुत करनी होगी प्रगति
बैठक में सहायक संचालक रवि शंकर तिवारी ने भी निजी विद्यालयों के संचालन, शैक्षणिक गुणवत्ता और निर्धारित मानकों के पालन से जुड़े विषयों पर जानकारी दी। उन्होंने विद्यालयों के प्राचार्यों एवं प्रबंधकों से शासन के नियमों और मान्यता की शर्तों का पालन सुनिश्चित करने तथा शैक्षणिक गुणवत्ता में निरंतर सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा।
जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा कि विभाग निजी विद्यालयों की नियमानुसार समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन से विभाग और अभिभावकों की अपेक्षाओं के अनुरूप कार्य करते हुए विद्यार्थियों के शैक्षणिक एवं व्यक्तित्व विकास को प्राथमिकता देने और आगामी समीक्षा बैठकों में प्रगति प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
