जशपुर। ग्राम पंचायत जशपुर में स्वच्छता व्यवस्था को लेकर लगाए गए दावों और मौके की तस्वीरों के बीच बड़ा अंतर नजर आ रहा है। दीवारों पर “स्वच्छ जशपुर, स्वस्थ जशपुर, सुंदर जशपुर” जैसे संदेश लिखे हुए हैं, लेकिन दूसरी ओर कचरा संग्रहण के लिए रखे गए डस्टबिन और आसपास का परिसर अव्यवस्था की तस्वीर पेश कर रहे हैं।
मौके की तस्वीरों में कचरा पात्र व्यवस्थित स्थिति में नहीं दिख रहे हैं। आसपास घास-फूस और गंदगी भी नजर आ रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि स्वच्छता अभियान के तहत उपलब्ध कराए गए संसाधनों का नियमित उपयोग और रखरखाव किस तरह किया जा रहा है।
स्लोगन और जमीनी हकीकत में अंतर
स्वच्छता को लेकर जागरूकता संदेश लिखना अभियान का एक हिस्सा हो सकता है, लेकिन इसका वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब गांव के सार्वजनिक स्थानों पर नियमित सफाई, कचरा संग्रहण और उसका उचित निपटान सुनिश्चित हो।
ग्रामीणों का कहना है कि स्वच्छता के नाम पर किए जा रहे प्रयासों का असर गांव की गलियों और सार्वजनिक स्थलों पर दिखाई देना चाहिए। केवल संसाधन उपलब्ध करा देने या दीवारों पर संदेश लिख देने से स्वच्छता व्यवस्था प्रभावी नहीं हो सकती।

नियमित कचरा उठाव और रखरखाव की मांग
ग्रामीणों ने पंचायत क्षेत्र में नियमित कचरा उठाव, डस्टबिन की उचित देखरेख और सार्वजनिक स्थलों की सफाई व्यवस्था बेहतर करने की मांग की है। साथ ही स्वच्छता से संबंधित संसाधनों के उपयोग और रखरखाव की स्थिति की जांच कराने की भी मांग उठाई गई है।
तस्वीरों में दिखाई दे रही स्थिति के बाद यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि “स्वच्छ जशपुर” का संदेश जमीन पर कब दिखाई देगा? ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित अधिकारी मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का आकलन करें और जहां कमी मिले, वहां आवश्यक सुधार कराया जाए।
स्वच्छता अभियान की सफलता का आकलन केवल दीवारों पर लिखे नारों से नहीं, बल्कि गांव की साफ-सफाई, व्यवस्थित कचरा प्रबंधन और सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता से होना चाहिए।
