अंबिकापुर, 27 अगस्त 2026। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और योजनाओं का लाभ आम लोगों तक समय पर पहुंचाने के उद्देश्य से कलेक्टर अजीत वसंत ने स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक ली। बैठक में अस्पतालों की व्यवस्थाओं, मानव संसाधन, दवाइयों और उपकरणों की उपलब्धता से लेकर विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की गई। कलेक्टर ने अधिकारियों को स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के साथ लापरवाही बरतने वालों पर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पी.एस. मार्को, सिविल सर्जन जे.के. रेलवानी, राष्ट्रीय कार्यक्रमों के नोडल अधिकारी, बीएमओ, डीपीएम, बीपीएम सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
पीवीटीजी परिवारों की पूरी स्क्रीनिंग जल्द करने के निर्देश
कलेक्टर ने विशेष रूप से पीवीटीजी समुदाय के परिवारों की स्वास्थ्य स्क्रीनिंग अभियान की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिले के सभी पीवीटीजी परिवारों के प्रत्येक सदस्य का घर-घर जाकर स्वास्थ्य परीक्षण और डिजिटल हेल्थ प्रोफाइलिंग पूरी की जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कोई भी पात्र व्यक्ति स्वास्थ्य जांच से वंचित नहीं रहना चाहिए।
मातृ मृत्यु रोकने बने प्रभावी कार्ययोजना
मातृ मृत्यु के मामलों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने इसके कारणों की गहन पड़ताल कर रोकथाम के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीयन, नियमित प्रसव पूर्व जांच, हाई रिस्क गर्भावस्था की पहचान और ऐसी महिलाओं की लगातार निगरानी सुनिश्चित करने को कहा।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को संस्थागत प्रसव, पोषण, प्रसव पूर्व जांच और खतरे के लक्षणों के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए गए। मातृ मृत्यु दर कम करने के उपायों को लेकर सभी बीएमओ को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने के लिए सीएमएचओ को कहा गया।

एनआरसी में बच्चों की शत-प्रतिशत उपस्थिति पर जोर
पोषण पुनर्वास केंद्रों में भर्ती बच्चों की स्थिति की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने उनकी शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि बच्चों को निर्धारित अवधि तक पर्याप्त पोषण और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें। एनआरसी की नियमित मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी सीएमएचओ को दी गई।
ड्यूटी समय में निजी प्रैक्टिस पर कार्रवाई के निर्देश
कलेक्टर ने शासकीय अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सकों की समय पर उपस्थिति को लेकर भी सख्ती दिखाई। उन्होंने कहा कि ड्यूटी ऑवर में निजी प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों के नर्सिंग होम पर आवश्यक कार्रवाई की जाए। चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की निर्धारित कार्य अवधि में अस्पताल में मौजूदगी अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, ताकि मरीजों को इलाज के लिए परेशानी न हो।
दो अल्ट्रासाउंड मशीनों की खरीदी जल्द होगी
स्वास्थ्य केंद्रों में उपकरणों और सोनोग्राफी सुविधाओं की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने लुण्ड्रा और मैनपाट क्षेत्र में गर्भवती महिलाओं एवं अन्य जरूरतमंद मरीजों को समय पर जांच सुविधा उपलब्ध कराने के लिए निजी केंद्रों से पोर्टेबल सोनोग्राफी मशीन की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। वहीं डीएमएफ मद से स्वीकृत दो अल्ट्रासाउंड मशीनों की खरीदी प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए।
उन्होंने सभी स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने और मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने देने के निर्देश भी दिए।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर
बैठक में स्वास्थ्य विभाग के स्वीकृत और रिक्त पदों की स्थिति तथा विभिन्न पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने भर्ती प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरतने के निर्देश देते हुए कहा कि अनावश्यक पदों पर भर्ती नहीं की जाए और किसी भी प्रकार की शिकायत की स्थिति न बने।
टीकाकरण और स्वास्थ्य योजनाओं की भी समीक्षा
कलेक्टर ने टीकाकरण से वंचित हितग्राहियों की पहचान कर विशेष अभियान चलाने तथा सभी पात्र लोगों को निर्धारित टीके लगाने के निर्देश दिए। बैठक में आयुष्मान कार्ड, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना, सिकल सेल अभियान, चिरायु कार्यक्रम, एनआरसी और एनक्यूएएस सर्टिफिकेशन सहित विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।
इसके अलावा कुष्ठ उन्मूलन, मलेरिया नियंत्रण, अंधत्व निवारण, तंबाकू नियंत्रण, एनीमिया मुक्त भारत और बाल स्वास्थ्य कार्यक्रमों की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने संबंधित विकासखंडों को निर्धारित लक्ष्यों की शत-प्रतिशत पूर्ति सुनिश्चित करने तथा स्वास्थ्य सेवाओं को आमजन के लिए अधिक सुलभ बनाने के निर्देश दिए।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना प्राथमिकता होनी चाहिए और सभी अधिकारी-कर्मचारी अपने दायित्वों का गंभीरता एवं ईमानदारी से निर्वहन करें।
