अंबिकापुर। कुण्डला स्थित वसुंधरा सिटी के 110 भवनों को लेकर करीब नौ वर्षों से चली आ रही कानूनी लड़ाई में भवन स्वामियों को बड़ी राहत मिली है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कृष्णानंद सिंह एवं अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य शासन और नगर निगम अंबिकापुर की ओर से जारी उन आदेशों को निरस्त कर दिया, जिनके आधार पर भवनों को हटाने की कार्रवाई की जा रही थी।

मामला WPC No. 2856/2017, Krishnanand Singh एवं अन्य बनाम छत्तीसगढ़ शासन एवं अन्य से संबंधित है। उपलब्ध विवरण के अनुसार हाईकोर्ट ने 20 अगस्त 2026 को फैसला सुनाया। न्यायालय के निर्णय के बाद वसुंधरा सिटी के प्रभावित परिवारों में राहत का माहौल है।

निर्माण अनुमति और कार्रवाई को लेकर उठा था विवाद

मामले के अनुसार कुण्डला वसुंधरा सिटी में भवन निर्माण के लिए नगर निगम की ओर से वर्ष 2007 में अनुमति दी गई थी। इसके बाद अतिरिक्त निर्माण से संबंधित अनुमति के लिए वर्ष 2011 में आवेदन किया गया था। याचिकाकर्ताओं का पक्ष था कि इस आवेदन का विधिवत अंतिम निराकरण किए बिना ही बाद में भवनों को हटाने की कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ाए गए।

रिकॉर्ड में नगर निगम आयुक्त के वर्ष 2011 के एक आदेश का भी उल्लेख है, जिसमें निर्माण की स्थिति और लंबित आवेदन को देखते हुए निर्माण को आगे बढ़ाने की अनुमति दिए जाने की बात सामने आती है। इसके बाद भवनों के पूर्णता प्रमाणपत्र से संबंधित प्रक्रिया भी आगे बढ़ी।

पुराने आदेशों पर हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

विवाद के बीच राज्य शासन ने 4 जुलाई 2012 को निर्माण हटाने से संबंधित आदेश जारी किया था। बाद में नगर निगम अंबिकापुर के आयुक्त ने 7 दिसंबर 2016 को भवनों को हटाने की कार्रवाई से संबंधित आदेश जारी किया।

याचिकाकर्ताओं ने इन कार्रवाइयों को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुनवाई के दौरान न्यायालय के समक्ष निर्माण अनुमति, लंबित आवेदन, नगर निगम के पूर्व आदेश और भवनों से संबंधित दस्तावेजों का मुद्दा उठा।

हाईकोर्ट ने उपलब्ध रिकॉर्ड और मामले की परिस्थितियों पर विचार करते हुए संबंधित आदेशों को निरस्त कर दिया। फैसले का महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि प्रभावित भवन स्वामियों के अधिकारों पर असर डालने वाली प्रशासनिक कार्रवाई में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत और उचित सुनवाई के महत्व को रेखांकित किया गया।

वर्षों से असमंजस में थे परिवार

ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की आशंका के कारण वसुंधरा सिटी में रहने वाले परिवार लंबे समय से असमंजस में थे। जिन लोगों ने अपनी बचत और जीवनभर की कमाई से मकान बनाए थे, उनके सामने घर बचने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद इन परिवारों ने इसे बड़ी कानूनी राहत के रूप में देखा है। याचिकाकर्ता पक्ष ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि न्यायालय के निर्णय से वर्षों से चला आ रहा डर और असुरक्षा का माहौल खत्म हुआ है।

अब आगे क्या होगा?

हाईकोर्ट द्वारा संबंधित पुराने आदेश निरस्त किए जाने के बाद उन आदेशों के आधार पर की जा रही ध्वस्तीकरण कार्रवाई का आधार समाप्त हो गया है। हालांकि भवनों की वर्तमान वैधानिक स्थिति, अन्य अनुमतियों अथवा भविष्य में प्रशासन की ओर से किसी नई कार्रवाई की संभावना को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित न्यायालयीन आदेश और प्रशासनिक रिकॉर्ड के आधार पर ही स्पष्ट होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *